क्या करूँ

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दिल से तेरा ख्याल ना जाये तो क्या करूँ ।
तू ही बता तेरी याद आये तो क्या करूँ ।

हसरत है कि तुझे इक नजर देखूँ ,
किस्मत अगर ना दिखाये तो क्या करूँ ।

चारों तरफ़ तू ही नजर आये तो क्या करूँ ,
हवाये तेरी आवाज सुनाये तो क्या करूँ ।

मैं सर झुकाता हूँ सजदे में तेरे ही ,
तुझको ही ना नजर आये तो क्या करूँ ।

दिल में जलता हुँ, रात में जलता हूँ ,
तू ही “दीप” ना जलाये तो क्या करूँ ।

16 responses »

  1. मैं सर झुकाता हूँ सजदे में तेरे ही ,
    तुझको ही ना नजर आये तो क्या करूँ ।

    दिल में जलता हुँ, रात में जलता हूँ ,
    तू ही “दीप” ना जलाये तो क्या करूँ ।

    waah bahut khub,ehsaas bhi hai tere aur sawal bhi tujh se hi,tu jawab hi nahi deta kya karun.bahut dino baad aapko padhna achha laga.

  2. न जाने कहाँ कहाँ से आपके ब्लग पे पहुचा देखता गया देखता और देखता गया और बहुत अच्छा लगा “क्या karu..”

  3. हेमज्योत्सना जी

    बहुत दिनो से आपको पढने की इच्छा थी, आज यह ब्लोग खोलने को मिला तो आपकी कविता पढकर मजा आ गया, बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति,

    मैं सर झुकाता हूँ सजदे में तेरे ही ,
    तुझको ही ना नजर आये तो क्या करूँ

    बहुत सुन्दर पन्क्ति

    बधाई

  4. दिल से तेरा ख्याल ना जाये तो क्या करूँ ।
    तू ही बता तेरी याद आये तो क्या करूँ ।

    हसरत है कि तुझे इक नजर देखूँ ,
    किस्मत अगर ना दिखाये तो क्या करूँ ।

    चारों तरफ़ तू ही नजर आये तो क्या करूँ ,
    हवाये तेरी आवाज सुनाये तो क्या करूँ ।

    har panktiya behad khubsurat jyotsana sachmuch. Congrates.

  5. फूलों की तरह् आप के पास बिखर जायंगे।
    खुसबू की तरह् आप के दिल में उतर जायंगे।।
    आप महसूस कर के देखना,
    दूर होते हुये भी पास नजर आयंगे।

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