शहरों का बच्चा है

Standard

 
रंग महौब्बत का है 
ताउम्र चमकता रहता है ।
इस नगरी में जादु है 
गुलाल बरसता रहता है ।

क्या तुम से मिलता है ?
एक दिवाना भटकता रहता है ।
बचपन जिसके साथ है
वो हर पल चहकता रहता है ।

शाख से गिरता है
और भटकता रहता है ।
शहरों का बच्चा है
माँ को तरसता रहता है ।

____________
______________
दिल रात दिन रोशन है 
“दीप” जलता रहता है ।

14 responses »

  1. बधाई, ज्योत्सना जी.
    इंतज़ार तो बहुत लम्बा करवाया आपने पर कविता पढने के बाद लगा की इंतज़ार बेकार नहीं गया..
    ख़ूबसूरत कविता….. बेहद कसी हुई पंक्तियाँ……. हकीकत और कल्पनाओं को समेटे हुए…

  2. आधुनिक जीवन को आपने सीधे, सरल शब्दों में प्रभावशाली तरीके से काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी है । आपकी कविता का कथ्य, शिल्प, भाव और विचार सभी प्रभावित करते हैं। सूक्ष्म संवेदना को आपने बडी बारीकी से रेखांकित किया है । बधाई ।

    मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-फेल हो जाने पर खत्म नहीं हो जाती जिंदगी-समय हो तो पढें और अपनी राय भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

  3. कविता की जितनी भी तारीफ की जाए कम है।
    वक्त की नजाकत का बयाँ अच्छा है।
    उम्मीद अच्छी है, परिणाम भी अच्छा होगा।
    दिल रात दिन रोशन है
    ‘‘दीप’’ जलता रहता है।

    शाख से गिरता है, भटकता रहता है वाली बात का कुछ काव्य भाव समझ नहीं आया क्योंकि
    अगली पंक्ति शहर का बच्चा माँ का तरसता रहता है बहुत खूब है।

    रंग मुहब्बत का ताउम्र चमकता रहता है। काश ये भी होता ..
    इस नगरी का जादू है (आज का ऐसी नगरी दिखाई नहीं देता)

    कुल मिलाकर एक कविता के रूप में बहुत खूब है।
    आपने अपनी शैली को जिन्दा रखा है।

  4. रंग महौब्बत का है
    ताउम्र चमकता रहता है ।
    इस नगरी में जादु है
    गुलाल बरसता रहता है ।

    always mohabbat….

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s