कल

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कल याद मेरी उसे रुला आई है ।
कल बात मेरी बिगड़ती बना आई है ।

कल शाम सुबह सा मन्ज़र कर ,
कल रात मेरी पतझड़ बहार आई है ।

कल क्या था कुछ खास नहीं ,
कल शाख मेरी लहरा लहरा आई है ।

कल चुप चाप दबे पावं चला आया ,
कल आवाज़ मेरी वहाँ से आई है ।

कल-कल कल-कल कल बहता रहता था ,
कल नदिया मेरी साहिल बह कर आई है ।

कल याद मेरी ….

कल तुम जागे सोये से , बातों में खोये से ,
कल धूप मेरी छांव पर छाई है ।

कल इक दस्तक सी मौजूद रही ,
कल जिन्दगी मेरी चल के फ़िर आई है ।

कल कल था या ख्वाब कोई था ,
कल आंगन मेरी खुँशियाँ खुशबू छाई है ।

कल बुझा बुझा सा था “दीप ”
कल रोशनी मेरी नये नूर नहाई है ।

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