दिल के मेहमान

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गम कभी दिल के मेहमान नहीं होते ,
दोस्त कभी दिल से जुदा नहीं होते ।

हद नहीं होती किसी प्यार के पैमाने की ,
चूर नशे में मयखाने नहीं होते ।

उम्र में घाव बढ़ते रहते फ़िर भी ,
दिल से बच्चे कभी सयाने नहीं होते ।

महफ़िल में आकर आफ़त मोल ली ,
यादो में अब तेरी वीरानें नहीं होते ।

दोस्ती प्यार के अब दौर नहीं ,
सच होता तो हम दिवाने नहीं होते ।

बुते-ए-बेपीर की कैसी ईबादत ,
पत्थर कभी किसी से खफ़ा नहीं होते ।

आइने से पुछलो अक्स एक अब तेरा मेरा ,
प्यार में हम हम, तुम तुम नहीं होते ।

नशा है “दीप” तेरा आज भी उतरा नहीं ,
वरना ख्यालों के फ़साने नहीं होते ।

17 responses »

  1. प्रतिक्रिया देने के लिये सभी का बहुत बहुत शुक्रिया ,
    आदाब अनसारी जी ,
    बहुत दिनो बाद आना हुआ ,

    जी वो शब्द अक्स ही है गलत लिख दिया था ।
    शुक्रिया आपने बताया ।

    सादर
    हेम ज्योत्स्ना “दीप”

  2. हद नहीं होती किसी प्यार के पैमाने की ,
    चूर नशे में मयखाने नहीं होते ।

    ye pankti bahut achhi lagi

  3. हद नहीं होती किसी प्यार के पैमाने की ,
    चूर नशे में मयखाने नहीं होते ।

    आइने से पुछलो अक्स एक अब तेरा मेरा ,
    प्यार में हम हम, तुम तुम नहीं होते ।
    Bahut khoob….ye panktiyaan bahut achhi lagi….badhaayi..

  4. उम्र में घाव बढ़ते रहते फ़िर भी ,
    दिल से बच्चे कभी सयाने नहीं होते ।

    हद नहीं होती किसी प्यार के पैमाने की ,
    चूर नशे में मयखाने नहीं होते ।

    बहुत सुंदर भाव हैं।
    बहुत ख़ूब!

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