वादे नहीं करते

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हम वादे नहीं करते टूट जाते हैं ,
कोशिशे करते हैं कामयाब हो जाते हैं ।

कितने भी मजबूत हो धागे सभी ,
रिश्तो की तरह वो टूट ही जाते है ।

गुलो का कितना भी रखो ध्यान ,
पेड़ से टूट कर मुरझा ही जाते हैं ।

कोई पीछा करता है  साये की तरह ,
यादें साथ छोड़ती ही नहीं हम जहाँ जाते है ।

सब अजीब है , कुछ अलग है सभी ,
दुनिया में सभी लोग, सनकी पाये जाते है ।

क्या जाने क्या , अनकहा चेहरे पर कुछ ,
हर बार मिलते है पर , कुछ छुपाये जाते है ।

(College के समय लिखी है यह रचना)

11 responses »

  1. क्या जाने क्या , अनकहा चेहरे पर कुछ ,
    हर बार मिलते है पर , कुछ छुपाये जाते है ।
    sach hai na hem,an mein kuch ,chehre pe kch,hum bhi aise hi to hote hai.har rishta bhi tut jata hai ek din,bahut achhi rachana,sachai ka saar liye.sundar.

  2. अच्छा लिखा है आपने । देश के मौजूदा हालात को बयान करते हैं आपके शब्द ।

    मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-समय हो पढें और कमेंट भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

  3. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना है।

    गुलो का कितना भी रखो ध्यान ,
    पेड़ से टूट कर मुरझा ही जाते हैं ।

    यह पंक्तियां बहुत अच्छी लगीं।
    टिप्पणी पर गलती से नाम आदि बदलना भूल गया था तो यही टिप्पणी समीर लाल जी
    के नाम से submit हो गई थी। अब अपने नाम से दोबारा submit कर रहा हूं।

  4. JO TUT JAYE WAHI KHARA H.
    JO NA TUTE WO BANKE BHI NAHI BANA H.
    AKAD HOTI H UNME JO TUTTE NAHI,
    JO TUT JATE H WO BAR BAR BANTE SAWARTE H.
    JO TUTE KO JOD PAYE WO KALAKAR HOTA H,
    JO TUTE SE MOOH MOD LE WO GARDAR HOTA H.
    (SORRY FOR TYPING IN ENGLISH)
    BUT YOUR VIEWS ARE YOURS PERHAPS WADA AUR PRAN ALAG ALAG HOTE H.

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