हम पी के शराब आ गये

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इक लहर सी उठी समन्दर में सैलाब आ गये,
सहर ही हुई थी हम पी के शराब आ गये ।

महफ़िल में रंग जमने को था ,
कि हम जैसे कुछ लोग ख्रराब आ गये ।

चेहरे पे शीकन आँखों मे सवाल ,
मिलते ही दोस्तो से सब जवाब आ गये ।

खुदा तेरा ही है ये जादू सारा ,
कि कांटों के साथ जो गुलाब आ गये ।

हमने मांगा था “दीप” कि रोशनी हो ,
मरने को क्यूँ पतंगे बेहिसाब आ गये ।

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