चलना है चलना है , चलना मगर ,

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एक गीत –
माना है मुश्किल बहुत ये मेरी ड़गर ,
फ़िर भी चलना है चलना है , चलना मगर ,
हो पास कोई या ना  भी हो ,
हो साथ कोई या ना भी हो ,
मेरा है मेरा है मेरा सफ़र ,
फ़िर भी चलना है चलना है , चलना मगर ,
कहाँ पर कोई मिलेगा , कहाँ बिछड़ जायेगा ,
एक गया है अभी एक नया मोड़ फ़िर आयेगा ,
मुश्किल है मुश्किल है , मुश्किल ड़गर ,
फ़िर भी चलना है चलना है , चलना मगर ,
कोई कहीं पर मेरा भी है ,
फ़िर भी शायद ना मुझको मिले ,
तन्हा तन्हा चले या हो सगं हमसफ़र ,
फ़िर भी चलना है चलना है , चलना मगर ,

7 responses »

  1. AAPKI ES KAVITA YA GEET MEIN MAJBURI JAYAD AUR UTASAH KAM LAGA. AAPNE AKELE CHLANE KA HI SANDESH DIYA H. YEH MANUSHAY KE LIYE VASTVIKTA SE PARE H. KAVITA KI NAZAR MEIN BAHUT ACHHA MATTER H. MANCH KI KAVITA H YEH. JIWAN KI NAHI LAGI. AAP TO SADIAV JIWAN KI KAVITA KIJHTE HO. SO ………….

  2. बहुत अच्छा िलखा है आपने । िजंदगी और समाज के सच को बडी मािमॆकता से अभिव्यक्त किया है । आम आदमी की पीडा को शब्दबद्ध करने के िलए साधुवाद । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है-आत्मिवश्वास के सहारे जीतें िजंदगी की जंग-समय हो तो पढें और अपनी राय भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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