तुम ही थे…

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ख्वाब के बिखरे तिनके जख्म जब दे रहे थे ,
तुम ही थे एक बस , जो साथ मेरा दे रहे थे ।
दुर तक जब देर तक , आँखों में मृगतृण्णा रही ,
तुम ही थे पास जो हम से हकीकत कह रहे थे ।
दौर ही कुछ जमाने का यूँ ही था चल रहा ,
वक्त से पहले ही दिन शाम में था ढ़ल रहा ,
तुमने हमको थामे रखा जब हम बिखर रहे थे ।
गर्दिशो में एक उम्र , अपनी बीता कर देखी है ,
दोस्ती के नाम पर चोट खाकर देखी है ।
तुमने तब भी हाथ में हाथ थामे रखा ,
बेबसी के हाल में उम्मीद से नाता जोड़े रखा ।
विरानियों में जब भी हम खोने लगे ,
तुम ही थे वो जो महफ़िलें हमको दे रहे थे ।
Many Happy Returns Of The Day ……….. Wishing You a very very Happy Birthday…… My Friend Suruchi

9 responses »

  1. सुरुचि जी को हमारी तरफ से भी जन्म दिन की बधाईयां।
    इतना सुन्दर तोहफा तो आप ही दे सकती थी उन्हें। 🙂

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