वही तो महान है – पहली कविता

Standard

धन है तो मन है ,
ज्ञान है तो सम्मान है ,
चरित्र है तो इन्सान है ,
नहीं है असत्य तो ड़र भी नहीं है ।
जिसमें है ये सभी , वही तो महान है, वही तो महान है ।

अहिंसा बिन मानव नहीं ,
प्यार बिन मानव नहीं ,
आत्मा बिन मानव नहीं ,
वह तो पशु समान है ,
जिसमें है ये सभी , वही तो महान है, वही तो महान है ।

—————————————————————————————-

यह कविता मेरी पहली कविता है , जो मैंने कक्षा 11 (1999) में लिखी थी ।
इस कविता को मैंने एक व्यक्ति विशेष पर , उनके व्यवहार पर लिखी थी |
जब मैंने इसे अपनी English Teacher को सुनाया था तब उन्होने इसमें एक परिवर्तन करवाया था ।
मैंने इसमें महान शब्द के स्थान पर भगवान शब्द लिखा जिसे मेरी Fav English Teacher ने यक कह कर हटवाया के भगवान की ये परिभाषा नहीं हैं ।
और तब से मैंने शब्दो का सही प्रयोग करना सीखा ।
हिन्द-युग्म के काव्य-पल्लवन के विषय ” पहली कविता ” में प्रकाशित हुई थी ।

11 responses »

  1. ज्योत्स्ना जी
    हैरान हूँ की आप कक्षा ११ में भी इतनी अच्छी कविता कैसे कर लेती थीं? इतने अच्छे विचार और भाषा लगातार प्रयास करने पर भी नहीं आते. बहुत बढ़िया लिखी थी आप ने ये कविता. इसी से लगता है “होनहार बिरवान के होत चीकने पात”
    नीरज

  2. अहिंसा बिन मानव नहीं ,
    प्यार बिन मानव नहीं ,
    आत्मा बिन मानव नहीं ,
    वह तो पशु समान है ,
    जिसमें है ये सभी , वही तो महान है, वही तो महान है ।

    bahut sahi,aatma aur pyar do jaruri hai insaan banne ke liye,bahut khub

  3. इतनी छोटी आयु में एक गूढ़ विषय को लेकर इतनी सुंदर कविता लिखना – एक भावी महान कवयित्री का सूचक है जिसका प्रमाण आपकी रचनाओं में
    स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
    शुभकामनाएं सहित
    महावीर शर्मा
    (मेरा आप्रेशन कुछ समय के लिए टल गया है। अब आप की जो रचनाएं पढ़ने में
    छुट गई थीं, आराम से पढ़ने का आनंद ले रहा हूं।)

  4. अच्छी है पहली कविता ! लगता है सोच-सोच कर दिमाग़ से लिखी गई वैसे आपकी आजकल की कविताएँ सीधे दिल से निकलती है।

  5. Hi Hem,
    Pahle Kavita Hamesha Dil ke pass hoti hai, word chye kaise bhi kiyon na ho…Tumhri teacher ne sahi kaha tha us waqt…insaan ki paribhasha yehi hoti hai…kavita ki suru ki line hames dil ke kareeb hoti hai,,,,kabhi kabhi kuch din baad kavita dubaara padne ke baad kuch naye shab yaad aati hai…kher pahle kavita dikhai dhanyad….
    sory for late coming again on ur blog..actuly father was not well…now ok
    rohit
    rohit@soon.com

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s