के तुम आ गये

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एक  गीत 

बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम  गये |
कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये |

हे मजिंल कहाँ और राहें ये कैसी ,
यूँ ही बेवजह चले जा रहे थे के तुम आ गये |

कभी तो सुनू  हालदिल तुझसे तेरा ,
शोरदुनिया सुने जा रहे थे के तुम  गये |

मुझे मुस्कुराने की आदत नहीं थी ,
बेसबब  हम रोए जा रहे थे के तुम  गये |

थे टूटे हुए पर , थे टूटे हुए ,
पर , ना बिखर पा रहे थे के तुम  गये |

थी वीरान दुनिया ख्वाबो की मेरी ,
ख्यालो में भी थे खामोशी के साये ,के तुम  गये |

जो सर को झुका लूँ ,लगे सामने तुम ,
जो आँखे करू बंद , नज़र आए तुम ,
तुम ही ये बताओ के तुम कौन हो ?
खुद ही से तेरी बातें किए जा रहे के तुम  गये |

7 responses »

  1. कभी तो सुनू हाल-ए-दिल तुझसे तेरा ,
    शोर-ए-दुनिया सुने जा रहे थे के तुम आ गये |

    मुझे मुस्कुराने की आदत नहीं थी ,
    बेसबब हम रोए जा रहे थे के तुम आ गये |

    थे टूटे हुए पर , थे टूटे हुए ,
    पर , ना बिखर पा रहे थे के तुम आ गये |

    bahut bahut khubsurat hemji,tute huye par,na bikhar pa rehe ,ke tum aagaye,very very touching.
    tumhi batao tum kaun ho,intazaar uska aur puchna bhi usise,bahut pyari ada hai.
    shandar geet hai.

  2. थे टूटे हुए पर , थे टूटे हुए ,
    पर , ना बिखर पा रहे थे के तुम आ गये |
    बहुत सुंदर शब्द और भाव…लिखती रहिएगा.
    नीरज

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