जिन्दगी में बहुत काम आया हमें

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जो गम देके तुमने सिखाया हमें ।
जिन्दगी में बहुत काम आया हमें ।
जब लगी ठोकर , गिर के बैठ गये ,
 तब लगा पास तुमने बिठाया हमें ।
गुजर जाते बरसो मगर ना समझते ,
चन्द लम्हों में तुमने समझाया हमें ।
 हे वही फिर भी, नई सी लगी ,
जाने कैसे दुनिया को तुमने दिखाया हमें ।
जो हुऐ हम परेशां , कहीं पे कभी ,
 आ-आ के यादों में बहुत बहलाया हमें।
कभी जब लगा रुठे बैठे हैं हम ,
 तो बहुत खूब तुमने मनाया हमें ।
जानते थे हम भी कुछ मगर ,
लगा जैसे सब तुम्ही ने बताया हमे ।

15 responses »

  1. कभी जब लगा रुठे बैठे हैं हम ,
    तो बहुत खूब तुमने मनाया हमें ।
    जानते थे हम भी कुछ मगर ,
    लगा जैसे सब तुम्ही ने बताया हमे ।
    hem these last lines r mind blowng,again very dilkash peshkash from u,beautiful.

  2. जब लगी ठोकर , गिर के बैठ गये ,
    तब लगा पास तुमने बिठाया हमें ।
    जब लगी ठोकर , गिर के बैठ गये ,
    तब लगा पास तुमने बिठाया हमें ।
    बहुत सुंदर शब्द दिल को छूते भाव…..वाह…बहुत अच्छा लगा आप को पढ़ कर. ऐसे ही लिखते रहिये
    नीरज

  3. आपकी कुछ ग़ज़लनुमा रचनायें देखीं.
    काफिया (प्रास) रदीफ (अनुप्रास) ग़ज़ल के मुख्य अंग हैं रदीफ के बिना ग़ज़ल हो सकती है
    काफिया के बिना नहीं.आप इनकी समझ प्राप्त करें.
    आपकी उपरोक्त ग़ज़लनुमा रचना से बात करूँ
    हमें की रदीफ हैं रदीफ यानि वह शब्द का टुकड़ा जो निरंतर हर शेर में एक सा आता है.
    काफिया का मतलब प्रास से है-सिखाया बिठाया आदि.
    अब बहर यानि छन्द हर ग़ज़ल निश्चित बहर में होती है.
    ज़िन्दगी में बहुत काम आया हमें.
    212 212 212 212
    आप इसे आसानी के लिए
    छोड़ दे सारि दुनियां किसी के लिए समझें.
    मात्र एक पंक्ति ज़िन्दगी में बहुत काम आया हमें.छन्द में हैं बाकी सब वज़न से खारिज़
    अब आप ही बतायें कि आप और आप के टिप्पणी करता ग़ज़ल के बारे में कितने संज़ीदा हैं.
    आप में जज़्बात हैं अगर उपरोक्त बातों पर गौर करें तो अच्छी ग़ज़ले लिख सकेंगी.
    आमीन डॉ.सुभाष भदौरिया.

  4. aaderniye Subhash bhadauria jee
    sahi kahaa aapne ghazal aur ghazal ke rules hote hai.
    aur mujhe unka ghayn bhi nhi hai… sahi tarike se…

    par aapne shayd ye partikriya galat post par ki… is rachna ko to maine ghazal naam bhi nhi diya.

    haan aur baki jagah bhi sirf naam main add kiya hai par mujhe pataa hai ke wo ghazal nhi…
    inhi rules ke karan main apni sabhi rachnao ko RACHNA kehti hun… ghazal nhi kehti…

    lekin aapki baatein bilkul sahi hai … age mera prasay rhega kisi bahar ke maapdando ko pura karti koi ghazal likh saku….

    saadar
    hem

  5. मोहतरमा आप के रचना कहने से क्या होता है प्राया आपकी रचनायें ग़ज़ल की तर्ज पर हैं
    वही मतला जिसमें प्रारम्भ की दो पंक्तियों में काफिया रदीफ फिर उसके बाद शेर की दूसरी पंक्ति में उसी काफिया रदीफ का निर्वाह.
    मैंने कहाँ ग़ज़ल कहा है पर ज्ञानी तो ग़ज़ल कह कर कुर्बान हो रहे हैं.आप अगर छन्द का भी निर्वाह करने लगे तो रचनाओं में संगीतात्मकता आजायेगी.
    एक छन्द आपकी रचना में खुद आ रहा है इसे साध ले.
    212 212 212 212 ये पंच अक्षरीय है.कुछ उदाहरण देखें.

    दूर मुझसे मेरी ज़िन्दगी हो गई.
    मेरी चाहत में कोई कमी हो गई. डॉ.सुभाष भदौरिया

    खुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरी.
    बेवफा ही सही दिलरुबा है मेरी.
    आप इस मंत्र का रियाज़ करें.
    शुरू में गुरू अथवा दो लघु लेकिन बीच में लघु आना चाहिए.
    ये उर्दू की मशहूर बहर है.ज्यादातर गीतकार ग़ज़लकार इसका इस्तेमाल करते हैं.
    खैर आपकी मर्जी है रचना कह कर तमाम शर्तों से बच जायें.शिल्प का काम मुश्किल ज़रूर है पर असंभव नहीं.
    सारे आलम पर हूँ मैं छाया हुआ.
    मुस्तनद है मेरा फ़र्माया हुआ. (मीर तकी मीर)

  6. aaderniye Subhash bhadauria jee

    main aage koshish karungi ke CHand ka nirwaah kar saku. avam ghazal ko puri tarnh se sahi likh saku.

    aapki pratikriya mujhe behtar banane mein mujhe bahut sahyog dengi.
    waise aap se phele bhi kuch VarishTh kaviyon ne mujhe Bahar ke mapdand ke baarein mein bataya tha. mera prayas jaari hai. abhi 8-ARKAAN avam simplest Bahar RAMAL ko samjhne ke koshish kar rhi hun..
    Asha karti hun… aage bhi aapka sahyog milta rehga..

    Saadar
    hemjyotsana

  7. ‘बहुत काम आया हमें’- मतला (पहला शेर) ही कमाल का है, स्वतः ही आगे
    पढ़ने की उत्सुकता रहती हैः-
    जो ग़म देके तुमने सिखाया हमें।
    ज़िन्दगी में बहुत काम आया

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