इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं

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सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |

जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |

माना के तबाह किया उसने मुझे ,
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |

ज़ख़्म दिल के नासूर ना बन जाए
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |

माना वो ज़िंदगी हैं मेरी लेकिन ,
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |

इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |

महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |

रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो “दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|

16 responses »

  1. क्या खुब लिखा है “दीप”, गजल काफी पसंद आया ।

    इसी तर्ज पर कुछ यूँ अर्ज है —

    जिन बातों को कल तक न समझा था,
    न जाने क्यों , आज समझना जरुरी है ।

    कल तक एक चांद चलता था साथ मेरे,
    बची यादों की सफर, और अफ़साने ज़रूरी हैं |

  2. बहुत बढिया गजल है।बधाई।

    महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
    दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |

    रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
    सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|

  3. जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
    उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
    wah wah jyotsanaji,dil kush kar diya apne.
    jab ishq kiya hai,to uske saath aanewali ilzam bhi to sahne hi honge.
    deep bujhanewala sher bhi khas hai ekdam.
    aurमहफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
    दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
    ye wala bhi.masha allah.

  4. बहुत प्यारी और सच्चाई से भरी पंक्तियाँ हैं !

    इबादत से नहीं मिलता, खुदा किसी को
    पत्थरों से अश्क निकालने जरूरी हैं !

  5. इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
    इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं|

    ye lines kuchh khaas hain. yakeen maniye, main to inko dil se laga chuka hun.

    Khoob likhiye, Likhte rahiye.

    Thanks

  6. bahut khoob- jyoti….
    ek software engineer itna touchy hoga kya zamanz mehsoos kar sakta hai
    sach hai
    zindagi ke aine mein zindagi sharma gayee
    tumne zab palke uthaein chandni sharma gayi
    but i say
    tumne zab kavita likhi to shayari sharma gayee

  7. वाह! बहुत ख़ूबसूरत ख़यालों से भरी हुई गज़ल हैः
    इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
    इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
    रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
    सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|
    बहुत ख़ूब!

  8. 1…..कल तुम गुजर रहे थे ,
    या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था ….
    कल आहट थी कोई पहचानी ,
    या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था ….
    कल चाँद था फलक पर ,
    या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था ….
    मैने बहुत रोका मगर ,
    वो ना था ना नज़र आरहा था ….
    पागल दिल था शायद तुझे ,
    तुम्हे हर शे में पा रहा था ……………………………………………………………………………………………………………………………………………………….

  9. भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे ,
    सबके साथ होकर भी जब कोई अकेला दिखाई दे |
    हँसते ही जिसके दिखे एक समंदर सा दर्द का ,
    देख जिसे लगे इंतज़ार में एक बुत अपने खुदा के ,
    जिसकी सोच समझ जैसे खोई सी लगे ,
    जिसकी बातों से ख़ुद तेरी तस्वीर बने ,
    बस बिना खोए एक भी पल उसे ,
    मेरा नाम लेके मिल लेना ,
    वो मैं ना भी हुआ तो कोई ग़म नहीं ,
    वो मेरे जैसा हो जाएगा ,
    मैं ना सही कोई तो तुम्हे मिल जाएगा |
    और अगर याद मेरा नाम भी तब ना आए ,
    तो बस अपने नाम से पुकार लेना उसे ,
    यक़ीन करो वो मैं हुआ तो एक पल में
    पहचान लूँगा , तुम्हे फिर तुमसे माँग लूँगा |

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