सुनाता रहा हूँ तुझे दिल की बातें

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सुनाता रहा हूँ तुझे दिल की बातें ,
तेरी आरज़ू में जिए जा रहा हूँ |

हूँ मदहोश या मैं दीवाना हूँ तेरा ,
तुझे हर तरफ़ हर घड़ी पा रहा हूँ |

भटकता रहा मैं रोशनी में भी लेकिन 
अंधेरो में भी अब तुझे पा रहा हूँ |

यूँ चल तो रहा हूँ मगर ना ख़बर हैं ,
मैं कैसे कहाँ और किधर जा रहा हूँ |

मगर इस यकीं पे मैं चल तो रहा हूँ ,
कि हो ना हो तेरे क़रीब  रहा हूँ |

तुझे पाके तुझको ही मांगता हूँ ,
तेरी दुआ मैं भी चला  रहा हूँ |

लिखें हैं जो मैने नहीं गीत मेरे ,
तेरी धड़कानो को बस गा रहा हूँ |

वहाँ जागता हैं रातों को तू भी ,
बन के दीप मैं भी जले जा रहा हूँ 

9 responses »

  1. लिखें हैं जो मैने नहीं गीत मेरे ,
    तेरी धड़कानो को बस गा रहा हूँ |
    teri dhadkono ko ga raha hun,behad khubsurat hai ye panktiyan jyotsnaji,janti hai aap ki nazm padhkar hame hamesha ek sukun ek khushi milti hai.phir milenge.

  2. अतिसुंदर बन पड़ी है ।

    जिसके लिए दिल की बातें लिखी गयी हो – वो पढ़े तो उसे जरूर छुऐगा । शुभकामनाएँ ..

    ( वर्तनी सुधार — धड़कानो , जागता हैं )

  3. bahut sundar geet hai ye thank you very much jo apne ise likha aur net par dala. Sorry aapse bina puche maine ise gaa kar apna ek fayda kiya. Meri wife mujse bahut dino se naraj thi… Meri ek galti ki wajh se main bahut koshish ki wo maan jaye par esa kar nahin paya par jab ye geet padaa to mere dil ko chu gayaa aur jab maine ise meri wife ko sunaya phone par to wo ro padi…. Fir unhone phone rakh diya bina kuch kahe aur agle din subh jab main utha to wo ghar par aachuki thi… Ek cup achi sweet chaye ke saath…… Thanks once again for this touching song… May God bless you…

  4. बहुत अच्छी रचना है। सारांश जी की टिप्पणी पढ़ने के बाद कुछ लिखने को ही नहीं
    बचा है। किसी के जीवन के पतझढ़ में बहारों के दिन लौट आए, ऐसी रचना के लिए
    बहुत बधाई के पात्र हो!

  5. कौन फूल कैसा है..राहुल तितलियाँ समझती हैं….

    आज कल के लड़कों को ये लडकियां समझती हैं…..

    चाहतों के रंगों से राहुल और दिल के कोरे कागज़ पर……..

    किसका नाम लिखना है….अंगुलियाँ समझतीं हैं….

    चुप कहाँ पर रहना है….राहुल और किस जगह खनकना है…..

    जानते हैं..ये कंगन के चूडियाँ समझतीं हैं….

    आंसुओं को आँखों मैं कैद करके रखा है..राहुल…

    किस जगह बरसना है…के बदलियाँ समझती हैं…

    हसरतें हैं क्या दिल मैं राहुल….खुल के कह नही पातीं….

    बाप की गरीबी को राहुल….बस ये बेटियाँ समझतीं हैं.

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