मेरा पुरा नाम हेम ज्योत्स्ना पाराशर ” दीप ” है । मैं एक इन्जीनियरिगं कांलेज में लेक्चरर हूँ । कोटा राजस्थान में रहती हूँ । कविता अपने लिये लिखती हूँ लेकिन औरों से बाटने में आनन्द मिलता है । प्रथम कविता कक्षा 11 ( 1999 ) में लिखी थी । तब से अब लिखती आ रही हूँ ।
आपकी अमुल्य प्रतिकिया के सदैव इन्तजार में...
हेम ज्योत्स्ना ’दीप’....
आप मुझसे बात यहाँ कर सकते .... आप चाहे तो अपना नाम और e-mail id भी दे सकते है ।
कुछ सपने लेकर मेरे कुछ गीत तुम्हारे देदो ।
लेकर सब सुर साज मेरे आवाज़ तुम्हारी देदो ।
सन्नाटे में सांसे अक्सर शोर मचाती हैं ,
दिल की धड़कन गीत कोई गाती हैं ,
सुनता हूँ जो गीत शब्दो से है बना नहीं ,
मेरे बोलो को तुम अपनी रवानी देदो ।
कुछ सपने लेकर मेरे कुछ गीत तुम्हारे देदो ।
लेकर सब सुर साज मेरे आवाज़ तुम्हारी देदो ।
चलती फ़िरती दुनिया में थमसा गया हूँ मैं ,
भटक रहा हूँ और थकसा गया हूँ मैं ,
सब से मिलता हूँ लेकिन किसी कुछ भी कहा नहीं ,
तुम अपले किस्से बुल कर मुझको कहानी देदो ।
कुछ सपने लेकर मेरे कुछ गीत तुम्हारे देदो ।
लेकर सब सुर साज मेरे आवाज़ तुम्हारी देदो ।
2 मार्च 2007 ,
जब मैनें अपने ब्लोग पर पहली पोस्ट की थी तो ये नहीं जानती थी कि आगे क्या होगा ।
बस युँ ही ब्लोग बनाया और फ़िर ….
यूँ सफ़र पे चल दिये थे के मंजिल का ना पता था ,
हम बह रहे थे युँ ही के साहिल का ना पता था ।
कविता मेरे लिये शब्दो की कोई जादुगरी सी नहीं बल्कि ज़िन्दगी से बात करने का एक रास्ता है । मैं जब भी ज़िन्दगी से बात करती हुँ या ज़िन्दगी की बात करती हूँ लिखने लगा जाती है जिसे कभी कविता कभी नज्म ……. या कभी हजल कह देती हूँ । बस ये मेरी रचनाये हैं जो मेरी तरह ही नियमों में बन्धना नहीं चाहती ।
लम्हे जिन्दगी के से मुझे बहुत कुछ मिला …….. ये मेरा एक साथी है जो मुझे समझता है मुझसे बात करता हैं जिसके जरिये में दुनिया से बात करती हूँ ।
लम्हे ज़िन्दगी के ने मुझे मेरे एक कमरे से एक नई दुनिया दिखाई जिसमे मुझे मेरी सोच और मेरे शब्दो के ने एक जगह बनाने दी है इस दुनिया में लगभग सभी मुझे नहीं जान कर भी जानते है ।
यहाँ मैनें बहुत सीखा और ये सब आप सब पढ़ने वालो के कारण जिन्होने मुझे सही और गलत समय समय पर बताया ।
कई नाम है पर सब से पहले जिन्हे में अपना यहाँ गुरू मानती हुँ महावीर सर , देवी नानरानी ,रमा जी ।
बहुत बहुत शुक्रिया आप से बहुत कुछ सीखा है और अभी बहुत कुछ सिखना हैं आप सब के मार्गदर्शन के लिये बहुत बहुत शुकिया । महावीर सर के ब्लोग पर हुए बरखा-बहार मुशयरा मेरा पहला मुशयरा था और मुझे बेहद खुशी है के मैं अपना पहला मुशायरा महावीर जी सर की छत्र-छाया में किया ।
आज एक विघालय HPS (हरियाणा पब्लिक स्कूल) डा़बवली की प्रार्थना बन गई है ।
जिसे खुद विघालय के डाइरेटर श्री रमेश सचदेव ने कम्पोस करवा कर मुझे भेजी हैं ।
रमेश सचदेव जी ने सब से मेरी रचनाये पढी़ हैं मुझे अपनी छॊटी बहन मानते है ।
रमेश जी बहुत बहुत धन्यवाद ।
RAMESH SACHDEVA (DIRECTOR)
HPS SENIOR SECONDARY SCHOOL
M. DABWALI-125104
मुझे अच्छा लगा सुन कर ,जान कर कि मेरी एक कविता एक विघालय में हर सुबह गुँज उठती हैं और इस लिये में रमेश जी की बहुत आभारी हूँ जिन्होने मेरी कविता को इस लायक समझा ।
रमेश जी ने मुझे भी वो रिकोर्डिग भेजी है इस में आवाज रमेश जी के मित्र Mr. Balzinder जी की है ।
Mr. Balzinder और सभी Composer को धन्येवाद ।
ब्लोग विवरण (1 मार्च 2009 तक )–
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