Index
98 ) कल
97) दिल के मेहमान
95) वादे नहीं करते
94) बेहाल ज़िन्दगी के
89) चलना है चलना है , चलना मगर
88 ) बापू का ख़त
87) खत्म कर गया
86) तुम ही थे
85) आफतों का शहर
84) कुछ कागज़ थे अज़ीज़
83) मन की चिड़िया
81) कभी कभी यूँ भी
80) लो अब उठता हूँ , लो अब जाऊँ
79) राधे रानी राह दे
78 ) मुसीबतें हमें पाल लेती है
77) बुखार की बातें
76) खाक होने से पहले
75) ज़माने वाले
74) वही तो महान है
72) एक मैं और एक मैं
69) 28 march-happy birthday to me
68 ) मिठी बोली हो गई
67) कह कर आप हंसे
66) कुछ ना मिला
65) हंसीन था ये सपना
63) लम्हो का एक साल
60) कविता हूँ मैं
59) जीवन बसन्त
58 ) मेरी प्रथम वेबसाइट
57) के तुम आ गये
56) जिन्दा है ईशान
55) बुढ़ापा
54) शोक सन्देश
53) 19000-hit-in-10-months-on-54-post
52) शुक्रिया आप सभी पढ़ने वालो का
51) दीप कहाँ है तू ?
50) जिन्दगी में बहुत काम आया हमें
49) HAPPY NEW YEAR
48 ) भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे
47) इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं
46) तुम ख़्यालो में हमको बुलाया करो
45) सुनाता रहा हूँ तुझे दिल की बातें
44) बिछुड़ ने की कोई रस्म नहीं होती
43) देखिए आप हमें यूँ ना सताया कीजे
42) सच्ची दीपावली
41) रिदा बदला ना करो
39) कत्लें आम किया
38 ) ग़म पे मेरे वाह-2 किये जाते हैं
37) राम कहाँ से लाऊ
36) मैं दो कदम चलता
35) दीप और अन्धेरा;
34) चन्द शेर-2
30) प्रश्न तेरी है कीमत क्या ?
29) दोस्ती हो ही गई
28 ) बेड़ीयाँ बाकी अभी है और भी
27) गर्व से कहे के हम भारतीय है।
24) स्वतन्त्रता संग्राम से थका देश
22) क्या देश को बांट रहे Reality Live shows ?
21) वो एक लड़की
19) मैं कौन हूँ
18 ) ये शिक्षक कहलाते है
17) Teachers Day ki duniya mein GURU-PURNIMA
15) खुदा से मिलने की ज़िद कर बैठा
14) झोंपड़े कहते है
13) मेरा परिचय
12) यादों के नगमें सुनाई देते है
11) उड़ना हवा में खुल कर लेकिन
9) ये शहर मेरा
8 ) चन्द शेर
7) दीवाने का घर
1 ) कल्पनायें सारी














विजय गोस्वामी said
हई ज्योत्स्ना मेरा नाम विजय गोस्वामी है मैं web developer हूँ नॉएडा मैं!
मैं भी कभी कभी कविता लिखता हूँ!
पर अभी तक किसी को बाटने में आनन्द नहीं लिया!
या यूँ कहो मुझे वक़्त नहीं मिलता है!
आज मैंने आपकी पोएम देखि है बहुत आछी लगी!
इसलिए मैं आपके लिए एक पोएम सेंड करना चाहता हूँ!
देखा जो आईना तो मुझे सोचना पड़ा
“देखा जो आईना तो ,मुझे सोचना पड़ा
ख़ुद से न मिल सका तो मुझे सोचना पड़ा
उसका जो ख़त मिला तो मुझे सोचना पड़ा
अपना सा वो लगा तो मुझे सोचना पड़ा
मुझको था यह गुमान कि मुझी में है एक अदा
देखी तेरी अदा तो मुझे सोचना पड़ा
दुनिया समझ रही थी कि नाराज़ मुझसे हैं
लेकिन वो जब मिला तो मुझे सोचना पड़ा
एक दिन वो मेरे ऐब गिनाने लगा करार
जब ख़ुद ही थक गया तो मुझे सोचना पड़ा!”
anil tahlani said
hi, jyotsana ji
main aaj hi aapki website dekhi aur maine isme se kuch kavitayen apni bhatizi ke liye copy ki main vakai apka shukrgujar hoon itni achchi kaviton ke liye.
munish said
jyotsana ji,
Aap bhadhai ke patra he,aapne bahut achchi kavitaye likhi he.me kota se hu aur app bhi kota se to laga hamare kota me bhi intane achche kavi he,garve hota. mene aaj hi aapki side ko dekha me google par hindi kavitaye thud raha the. bhgawan se dua ki app aur bhi achchi kavitaye likhte jaye aur hem unko padhte jaye aur anand me jhum jaye.