प्रिय देशवासियों ,
मैं यहाँ स्वर्ग में कुशल-मंगल हूँ आशा करता हूँ भारत में भी सब कुशल-मंगल ही होगा ।
इन दिनों सुभाष के कई शिष्ये ( शहीद ) आये और मंगल भगत भी वापस आने की तैयारी में लग रहे हैं तो मुझे लगा देश में सब थीक तो है या नहीं ?
आज देखा तो पता लगा मेरे देश में तो सब मेरे सिध्दांत आँख बन्द कर के माने जा रहे । कोई एक शहर में धमाके करता हैं तो आप उसे दुसरे शहर को आगे कर देते हो । जयपुर के बाद दिल्ली फ़िर कोई और अब मुम्बई के बाद किस्से बरबाद करवाने वाले हो ?
मेरे नाम पर क्या अपनी बेबसी मजबूरी कमजोरी छुपा रहे हो ? ये तो नहीं था मेरे सिध्दांत । मेरे और मेरे साथियों के बलिदान का यही मतलब निकाला है आपने सबने । पर इस बार शायद में नहीं आउंगा और आ भी गया तो शायद आजाद ना करा पाउँ ।
मुझे माफ़ करो , अपनी नाकमी को अहिंसा नाम मत दो ।
आपका अपना ,
बापू













