Archive for the ‘friendship-day’ Category
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on फ़रवरी 27, 2008
हंसी खुशी ,रिश्ते नाते ,एहसास दोस्ती से मिल कर बनी कविता हूँ मैं ,
जो अपनी होकर भी , बुरी लगे , एक ऎसी ही अजीब दुविधा हूँ मैं ,
अशोक के गर्म खून सी, बौध्द शान्ति में पली , गुमनाम संगमित्रा हूँ मैं ,
शब्द से निर्मित हूँ , शब्द अन्त है मेरा ,
मुक्त छोड दो तो खो जाती हूँ , हर बार बाधंनी जो पडे , एक ऎसी भुमिका हुँ मैं ।
हुनर जिसका भीड में नजर आता है , वो एक छोटी सी कणिका हूँ मैं ।
जिसके दामन में अश्क गिर के सोते है ,शायद ऎसी एक अंकिता हूँ मैं ।
जिन्दगी के रंगो से भरी , जख्मो से हर बार सजी ,
खुद से मिल खुद खो जाने वाली , एक अनजान चित्रा हूँ मैं ।
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Posted by Hem Jyotsana "Deep" on फ़रवरी 6, 2008
एक गीत
बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये |
कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये |
हे मजिंल कहाँ और राहें ये कैसी ,
यूँ ही बेवजह चले जा रहे थे के तुम आ गये |
कभी तो सुनू हाल-ए-दिल तुझसे तेरा ,
शोर-ए-दुनिया सुने जा रहे थे के तुम आ गये |
मुझे मुस्कुराने की आदत नहीं थी ,
बेसबब हम रोए जा रहे थे के तुम आ गये |
थे टूटे हुए पर , थे टूटे हुए ,
पर , ना बिखर पा रहे थे के तुम आ गये |
थी वीरान दुनिया ख्वाबो की मेरी ,
ख्यालो में भी थे खामोशी के साये ,के तुम आ गये |
जो सर को झुका लूँ ,लगे सामने तुम ,
जो आँखे करू बंद , नज़र आए तुम ,
तुम ही ये बताओ के तुम कौन हो ?
खुद ही से तेरी बातें किए जा रहे के तुम आ गये |
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Posted by Hem Jyotsana "Deep" on जनवरी 7, 2008
आती है पश्चिम से ये तूफ़ानी हवाएँ ,
घनघोर अंधेरा , छत पर आकर बादल लाएँ ,
मेरे कमरे को रोशन करता , दीप कहाँ है तू ?
गरज गरज कर बादल बरसे ,
बन्द दरवाजे पर देती दस्तक हवाएँ ,
कमरे में घुसने को आतुर ठंडी हवाएँ ,
डरा हुआ सहमा सा ,
कोने से ही देख रहा हूँ कमरा अंधियारा ,
अब तक तेरा साथ रहा है , तो तू बिछड़ा क्यूँ ?
दीप कहाँ है तू ?
चारों ओर है दबी दबी आवाज़े ,
कानो में अनचाहा अनकहा कह जाती हवाएँ ,
तूफ़ानो से तू लड़ता था जब ,
देखा करता था तुझको मैं ,
देख देख सीखा तुझसे , फिर तू बिछड़ा क्यूँ ?
दीप कहाँ है तू ?
अब फिर आकर रोशन हो जा ,
थका हुआ डरा हुआ सा ,
मैं बस तुझको ढूंढूं रहा हूँ ,
दीप कहाँ है तू ?
थक हार के जब बैठा पलभर ,
पलक करी जब बन्द पलभर ,
झिलमिल तुझको मन के अंदर रोशन पाया ,
भूल गया मैं , मेरे जीवन का दीप यहाँ है तू |
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Posted by Hem Jyotsana "Deep" on जनवरी 2, 2008
जो गम देके तुमने सिखाया हमें ।
जिन्दगी में बहुत काम आया हमें ।
जब लगी ठोकर , गिर के बैठ गये ,
तब लगा पास तुमने बिठाया हमें ।
गुजर जाते बरसो मगर ना समझते ,
चन्द लम्हों में तुमने समझाया हमें ।
हे वही फिर भी, नई सी लगी ,
जाने कैसे दुनिया को तुमने दिखाया हमें ।
जो हुऐ हम परेशां , कहीं पे कभी ,
आ-आ के यादों में बहुत बहलाया हमें।
कभी जब लगा रुठे बैठे हैं हम ,
तो बहुत खूब तुमने मनाया हमें ।
जानते थे हम भी कुछ मगर ,
लगा जैसे सब तुम्ही ने बताया हमे ।
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Posted by Hem Jyotsana "Deep" on दिसम्बर 28, 2007
एक नज़्म
भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे ,
सबके साथ होकर भी जब कोई अकेला दिखाई दे |
हँसते ही जिसके दिखे एक समंदर सा दर्द का ,
देख जिसे लगे इंतज़ार में एक बुत अपने खुदा के ,
जिसकी सोच समझ जैसे खोई सी लगे ,
जिसकी बातों से ख़ुद तेरी तस्वीर बने ,
बस बिना खोए एक भी पल उसे ,
मेरा नाम लेके मिल लेना ,
वो मैं ना भी हुआ तो कोई ग़म नहीं ,
वो मेरे जैसा हो जाएगा ,
मैं ना सही कोई तो तुम्हे मिल जाएगा |
और अगर याद मेरा नाम भी तब ना आए ,
तो बस अपने नाम से पुकार लेना उसे ,
यक़ीन करो वो मैं हुआ तो एक पल में
पहचान लूँगा , तुम्हे फिर तुमसे माँग लूँगा |
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Posted by Hem Jyotsana "Deep" on दिसम्बर 26, 2007
सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |
जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
माना के तबाह किया उसने मुझे ,
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |
ज़ख़्म दिल के नासूर ना बन जाए
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |
माना वो ज़िंदगी हैं मेरी लेकिन ,
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|
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Posted by Hem Jyotsana "Deep" on दिसम्बर 13, 2007
एक गीत
तुम ख़्यालो में हमको बुलाया करो ,
हम हक़ीकत में एक दिन चले आएगे,
यूँ तुम बिन तो ख़ामोश आवाज़ है ,
तुम से हमको हैं करनी कई बातें पर ,
तुम हमे अपने किस्से सुनाया करो ,
हम तुम्हारे ही क़िस्सों में चले आएगे |
खड़े हैं हर मोड़ पे मुंतजिर से हम ,
कभी तुम जो गुजरो किसी मोड़ से ,
अपनी नज़रो से हर और देखा करो ,
हम तुम्हे वही पे कही नज़र आएगे |
कभी जब लगे तुम को तन्हाई सी ,
या कही पे कभी सुकून ना मिले ,
तुम हमे नाम लेके पुकारा करो ,
हम उसी वक़्त मिलने चले आएगे |
कभी लड़खड़ाते क़दमो से रुक ने लगो ,
तुम मुझे याद कर अपना सहारा बनो ,
और हमसफर हमे बुलाया करो ,
हम साथ तुम्हारा देने चले आएगे |
कभी जब परेशान दुनिया करे ,
या कोई बात तुम्हे सताया करे ,
बेवजह तुम यूँही मुस्कुराया करो ,
हम हँसी तेरी सुन के चले आएगे |
ख़ामोशी में जब लगे घड़ी ग़ुज़ने ,
अंधेरो में जब डूब जाए जंहा ,
तुम अपने घर में ”दीप“ जलाया करो ,
हम तुन्हे उसमे ही रोशन नज़र आएगे |
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