लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for the ‘गज़ल’ Category

मिठी बोली हो गई

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on मार्च 20, 2008


रंगो ने की रंगो से बातें होली हो गई ।
मस्ती में मस्तो का मिलना टोली हो गई ।

देखा चुराया माखन ,खूब लगाई ड़ांट ,पर
देख के भोले मोहन को वो ,भोली हो गई ।

मन रंगा जब से श्याम रंग में ,
हर एक खुशी मेरी अब ,हमजोली हो गई ।

हर रात को बंसी सुन सुन कर ,
नीम चढ़े मेरे मन की , मिठी बोली हो गई ।

जब दिल ने आवाज़ लगाई कान्हा कान्हा कान्हा ।
सुख सपनो से भारी , मेरी झोली हो गई ।

मुस्का के जब जब देखा मैंने उसको ,
बीच खड़ी सब दिवारें पल में ,पोली हो गई ।

पूजा दिल में दिल से जब जब उस मुरत को ,
सांसे धड़कन मेरी ,चन्दन रोली हो गई ।

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उडती तितली की तरह

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on मार्च 4, 2008


उदास रात की कोई सुबह हसीन नहीं ।
नहीं आँसमां मेरा ,मॆरी कहीं ज़मीन नहीं ।

मैं खूशबू बन के हवा में नहीं बसती ,
मैं कोई किरणों की तरह भी महीन नहीं ।

मुझे ख्वाबों में मत तराश अभी ,
उडती तितली की तरह, मैं कोई रंगीन नहीं ।

छुप जाते हैं कभी-कभी , चाँद-तारे भी,
मेरा कत्ल ही हैं , ये गुनाह कोई संगीन नही ।

दफ़न कर या जला दे अब मुझको ,
ज़िस्म में रूह नहीं ,अब कोई तौहीन नहीं ।

भूला बैठा है , वो वेवफ़ा मुझको ,
मिला कहीं तो पह्चाने, इसका भी यकीन नहीं ।

बुझ गया ये “दीप” ,सुबह के सितारे के लिये ,
खुश हूँ मिट कर भी , मैं कोई गमगीन नहीं ।

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इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on दिसम्बर 26, 2007


सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |

जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |

माना के तबाह किया उसने मुझे ,
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |

ज़ख़्म दिल के नासूर ना बन जाए
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |

माना वो ज़िंदगी हैं मेरी लेकिन ,
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |

इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |

महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |

रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|

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तुम ख़्यालो में हमको बुलाया करो

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on दिसम्बर 13, 2007


एक गीत 

तुम ख़्यालो में हमको बुलाया करो  ,
हम हक़ीकत में एक दिन चले आएगे,

यूँ तुम बिन तो ख़ामोश आवाज़ है ,
तुम से हमको हैं करनी कई बातें पर ,
तुम हमे अपने किस्से सुनाया करो ,
हम तुम्हारे ही क़िस्सों में चले आएगे |

खड़े हैं हर मोड़ पे मुंतजिर से हम ,
कभी तुम जो गुजरो किसी मोड़ से ,
अपनी नज़रो से हर और देखा करो ,
हम तुम्हे वही पे कही  नज़र आएगे |

कभी जब लगे तुम को तन्हाई सी ,
या कही पे कभी सुकून ना मिले ,
तुम हमे नाम लेके पुकारा करो ,
हम उसी वक़्त मिलने चले आएगे |

कभी लड़खड़ाते क़दमो से रुक ने लगो ,
तुम मुझे याद कर अपना सहारा बनो ,
और हमसफर हमे बुलाया करो ,
हम साथ  तुम्हारा  देने चले आएगे |

कभी जब परेशान दुनिया करे ,
या कोई बात तुम्हे सताया करे ,
बेवजह तुम यूँही मुस्कुराया करो ,
हम हँसी तेरी सुन के चले आएगे |

ख़ामोशी में जब लगे घड़ी ग़ुज़ने ,
अंधेरो में जब डूब जाए जंहा ,
तुम अपने घर में ”दीप जलाया करो ,
हम तुन्हे उसमे ही रोशन नज़र आएगे |

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सुनाता रहा हूँ तुझे दिल की बातें

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on दिसम्बर 11, 2007


सुनाता रहा हूँ तुझे दिल की बातें ,
तेरी आरज़ू में जिए जा रहा हूँ |

हूँ मदहोश या मैं दीवाना हूँ तेरा ,
तुझे हर तरफ़ हर घड़ी पा रहा हूँ |

भटकता रहा मैं रोशनी में भी लेकिन 
अंधेरो में भी अब तुझे पा रहा हूँ |

यूँ चल तो रहा हूँ मगर ना ख़बर हैं ,
मैं कैसे कहाँ और किधर जा रहा हूँ |

मगर इस यकीं पे मैं चल तो रहा हूँ ,
कि हो ना हो तेरे क़रीब  रहा हूँ |

तुझे पाके तुझको ही मांगता हूँ ,
तेरी दुआ मैं भी चला  रहा हूँ |

लिखें हैं जो मैने नहीं गीत मेरे ,
तेरी धड़कानो को बस गा रहा हूँ |

वहाँ जागता हैं रातों को तू भी ,
बन के दीप मैं भी जले जा रहा हूँ 

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बिछुड़ ने की कोई रस्म नहीं होती

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on दिसम्बर 3, 2007


तुझ से मिलने की ख़्वाहिश मेरी कभी कम नहीं होती 
मेरे हाथों की लकीरों से  , मेरी लड़ाई ख़त्म नही होती 

यूँ तो रोशन है दिल का कौना कौना तुझसे ,
कभी तो  , के तेरे बीन मेरे घर में रोशनी नहीं होती 

तुझे तो मिलना है मुझ से मेरे साथ जीना है ,
ये अलग बात के  ,खुदा से मेरी जंग ख़त्म नहीं होती ,

यहाँ के दरो-दीवार भी ख़फा रहते है मुझ से ,
ख़ुशबू- -नज़रों की  भी शिकायत कम नहीं होती ,

आ मेरे पास कभी यूँ गुन-गुनाता रहूँ तुझ को ,
मेरे ज़ुबान पर तेरी तारीफ़े  , कभी ख़त्म नहीं होती

हम जो मिलेगे , ना बिछहड़ेगे कभी फिर से ,
मिलने के बाद , बिछुड़ ने की कोई रस्म नहीं होती ,

मैने ये कब कहा के तू मेरी साँसे धड़कन ज़िंदगी है ,
मगर तेरे बिन ये मेरी ज़िंदगी , ज़िंदगी नहीं होती 

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देखिए आप हमें यूँ ना सताया कीजे

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on नवम्बर 30, 2007


देखिए   आप हमें यूँ    ना सताया कीजे
जब भी   दें , आवाज़    चले आया कीजे

कितना आसान है भीड़ में ख़ुद को अकेले रखना ,
तन्हाई में भी तो कभी मिलने आया कीजे 

देखिए आप की रौनक से है ये चाँद सितारे ,
देखता ही मैं रहूँ वो आईना बन जाया कीजे

दिल में बसते हो मगर निगाहों की खता क्या है 
दो घड़ी को चेहरा इनको भी दिखाया कीजे,

सुन के , धड़कन मेरी और बढ़ जाती है ,
नाम मेरा यूँ प्यार से ,  ना पुकारा कीजे ,

आप के दम से है बहारों का चमन ,
काँटों भरे गुल , दिल से ना लगाया कीजे .

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