पागल दिल था
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on अक्टूबर 15, 2009
कल तुम गुजर रहे थे ,
या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था ….
कल आहट थी कोई पहचानी ,
या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था ….
कल चाँद था फलक पर ,
या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था ….
मैने बहुत रोका मगर ,
वो ना था ना नज़र आरहा था ….
पागल दिल था शायद तुझे ,
तुम्हे हर शे में पा रहा था |
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This entry was posted on अक्टूबर 15, 2009 at 11:28 अपराह्न and is filed under दोस्ती, Blogroll, deep, hemjyotsana, hindi, kavita, life, poems, shayeri, Uncategorized.
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Vinod Kumar Pandey said
बढ़िया कविता..प्रेम का सुंदर एहसास..
समीर लाल ’उड़न तश्तरी’ वाले said
आह!! बहुत बेहतरीन!
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
-समीर लाल ’समीर’
शरद कोकास said
सूक्ष्म भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति है इस रचना मे । यह उत्कट प्रेम की कविता है ।
परमजीत बाली said
बहुत सुन्दर भाव!!
mehek said
कल आहट थी कोई पहचानी ,
या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था ….
कल चाँद था फलक पर ,
या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था ….
bahut sunder,ishq mein ek hi bhram aur ek hi aahat hoti hai,teri.
hem ji deepwali ki hardik badhai.
M Verma said
सुन्दर एहसास — सुन्दर रचना
Ramesh Sachdeva said
पागल दिल था शायद तुझे ,
तुम्हे हर शे में पा रहा था |
YOU CAN CALL IT LOVE OR IT IS CALLED JANOON WHEN IT IS FOUND IN EVERYTHING.
EXCELLENT ONE.
ONCE AGAIN HAVING A LESSON TO TEACH …
yoginder moudgil said
अच्छी रचना….. बधाई…
harish said
kisi ke intzaar me jindgi yun tabah hoti hai
yun hi din nikalta hai yun hi shaam hoti hai
prem ke ahsaason se bhari kavita ….ek abhivyakti …ek bhavna …
Sharad Agrawal said
Sunder kavita
Prem ke rumaniyat ko darshati kavita
kotishah badhai.
Raghu said
कल चाँद था फलक पर ,
या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था ….
मैने बहुत रोका मगर ,
वो ना था ना नज़र आरहा था …
सुभान अल्लाह….
Rvindra kumar said
this is very good poem and i want to that you are writting allwase.i will pray to god that you are writting very good allwase
mehek said
कल चाँद था फलक पर ,
या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था ….
मैने बहुत रोका मगर ,
वो ना था ना नज़र आरहा था
waah gazab baat keh di sunder
Ashutosh Kumar Mishra said
मैने बहुत रोका मगर ,
वो ना था ना नज़र आरहा था
bahut khub!!!
shahroz said
दिल से तेरा ख्याल ना जाये तो क्या करूँ ।…..संवर के टूट जाना है मुक्द्दर, मगर देखो ,या कल आहट थी कोई पहचानी ,.
कई रचना ..कई ख्याल ढेरों ख़लिश अनगिनत एहसासात..लेकिन ज़रा और रियाज़ गर लें तो निखर आ जाए..
एक आग्रह : लम्हें को लम्हे कर लें और जिन्दगी को ज़िन्दगी .
ज़ोर-क़लम और ज़्यादा यही दुआ है.
shwetatypical said
kavita mam i hav no words to express
bt lgta hai chot khayi hai apne hamari tarah ishq main
Nakul varma said
सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |
जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
माना के तबाह किया उसने मुझे ,
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |
ज़ख़्म दिल के नासूर ना बन जाए
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |
माना वो ज़िंदगी हैं मेरी लेकिन ,
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|
Nakul varma said
bahane se unki baat karte hai,
har pal unko mahsus karte hai,
itni baar to wo sans bhi na lete hoge ,
jitni baar hum unko yaad karte hai…..
Nakul varma said
खुदा से क्या मांगू तेरे वास्ते
सदा खुशियों से भरे हों तेरे रास्ते
हंसी तेरे चेहरे पे रहे इस तरह
खुशबू फूल का साथ निभाती है जिस तरह
सुख इतना मिले की तू दुःख को तरसे
पैसा शोहरत इज्ज़त रात दिन बरसे
आसमा हों या ज़मीन हर तरफ तेरा नाम हों
महकती हुई सुबह और लहलहाती शाम हो
तेरी कोशिश को कामयाबी की आदत हो जाये
सारा जग थम जाये तू जब भी गए
कभी कोई परेशानी तुझे न सताए
रात के अँधेरे में भी तू सदा चमचमाए
दुआ ये मेरी कुबूल हो जाये
खुशियाँ तेरे दर से न जाये
इक छोटी सी अर्जी है मान लेना
हम भी तेरे दोस्त हैं ये जान लेना
खुशियों में चाहे हम याद आए न आए
पर जब भी ज़रूरत पड़े हमारा नाम लेना
इस जहाँ में होंगे तो ज़रूर आएंगे
दोस्ती मरते दम तक निभाएंगे………NAKUL DEV
Nakul varma said
मुझे मेरा घर याद आता है जब भी कही रुकता है शाम का सूरज मुझे वो पल याद आता है ……
बादलो का आना वो पूरे आसमा मे बिखर जाना याद आता है ………
शाम को अकसर जब भी मंदिरों मे बजती थी घंटी,
तो दिए की बाती का टिमटिमाना याद आता है
वो चाँद के आने का इंतज़ार करना ओर रात को वो छत पर तारो को गिनना याद आता है
वो ठंड की सुबह वो शामों को फेला धुआ याद आता है
क्या कहू मुझे मेरे घर का हर कोना याद आता है
वो ममता का आचल वो सुबह वो शामों को हर बिता पल याद आता है
Nakul varma said
तेरी दोस्ती को पलकों पर सजायेंगे हम
जब तक जिन्दगी है तब तक हर रस्म निभाएंगे
आपको मनाने के लिए हम भगवान् के पास जायेंगे
जब तक दुआ पूरी न होगी तब तक वापस नहीं आयेंगे
हर आरजू हमेशा अधूरी नहीं होती है
दोस्ती मै कभी दुरी नहीं होती है
जिनकी जिन्दगी मै हो आप जैसा दोस्त
उनको किसी की दोस्ती की जरुरत नहीं पड़ती है
किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा
कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
वो किसी और दुनिया का किनारा होगा
काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल को
मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा
किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं
कोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा
देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा
और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा
कौन रो रहा है रात के सन्नाटे मे
शायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा
Nakul dev
Nakul varma said
जिस रोज़ हर पेट को रोटी मिल जायेगी
जिस रोज़ हर चेहरा हँसता नज़र आयेगा
जिस रोज़ नंगे बदन कपड़ों से ढके होंगे
जिस रोज़ खुशियों में वतन डूब जायेगा
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना .
जिस रोज़ किसानो के भरे खलियान होंगे
और रोज़गारशुदा वतन के नौजवान होंगे
जिस रोज़ पसीने की सही कीमत मिलेगी
इन महलों से बड़े जिस रोज़ इन्सान होंगे
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना .
जिस रोज़ राह में कोई अबला न लुटेगी
जिस रोज़ दौलत से कोई जान न मिटेगी
जिस रोज़ यहाँ जिस्म के बाज़ार न लगेंगे
जिस रोज़ डोली दर से कोई सूनी न उठेगी
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना .
ये हाथ पसारे मासूम बचपन हजारों
जिस रोज़ मुझे राह में घूमते न दिखेंगे
जिस रोज़ ज़र्द, पिचके वीरान चेहरों पे
भूख के नाचते – गाते बादल न दिखेंगे
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना………..by…Nakul dev
Nakul varma said
1 दोस्ती करें, फूलों से ताकि हमारी जीवन-बगिया महकती रहे।
2 दोस्ती करें, पँछियों से ताकि जिन्दगी चहकती रहे।
3 दोस्ती करें, रंगों से ताकि हमारी दुनिया रंगीन हो जाए।
4 दोस्ती करें, कलम से ताकि सुन्दर वाक्यों का सृजन होता रहे।
5 दोस्ती करें, पुस्तकों से ताकि शब्द-संसार में वृद्धि होती रहे।
6 दोस्ती करें,ईश्वर से ताकि संकट की घड़ी में वह हमारे काम आए।
7 दोस्ती करें, अपने आप से ताकि जीवन में कोई विश्वासघात ना कर सके।
8 दोस्ती करें, अपने माता-पिता से क्योंकि दुनिया में उनसे बढ़कर कोई शुभचिंतक नहीं।
9 दोस्ती करें, अपने गुरु से ताकि उनका मार्गदर्शन आपको भटकने ना दें।
10 दोस्ती करें, अपने हुनर से ताकि आप आत्मनिर्भर बन सकें……….by nakul dev
Nakul varma said
युँ तो बहुत कुछ है पास मेरे फिर भी कुछ कमी सी है
घिंरा हूँ चारो तरफ़ मुस्कुराते चेहरो से
फिर भी जिन्दगी में उजाले भरने वाली उस मुस्कुराहट की कमी सी है
दिख रही है पहचान अपनी ओर उठते हर नज़र में
फिर भी दिल को छु लेने वालि उस निगाह की कमी सी है
गुँज़ता है हर दिन नये किस्सो, कोलाहल और ठहाको से
फिर भी कानो में गुनगुनाति उस खामोशी कि कमी सी है
बढ़ रहे है कदम मेरे पाने को नयी मन्ज़िलें
फिर भी इन हाथो से छुट चुके उन नरम हाथो की कमी सी है.
“हमेशा हँसते रहो, हँसना ज़िन्दगी की जरूरत है,
जिन्दगी जियों इस अन्दाज़ में कि आप को देंखकर लगे की जिन्दगी कितनी खूबसूरत है …….ND
Nakul varma said
क्या लिखूँ
कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ
या दिल का सारा प्यार लिखूँ कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखू या सापनो की सौगात लिखूँ ॰॰॰॰॰॰
मै खिलता सुरज आज लिखू या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ ॰॰॰॰॰॰
वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सान्स लिखूँ
वो पल मे बीते साल लिखू या सादियो लम्बी रात लिखूँ
मै तुमको अपने पास लिखू या दूरी का ऐहसास लिखूँ
मै अन्धे के दिन मै झाँकू या आँन्खो की मै रात लिखूँ
मीरा की पायल को सुन लुँ या गौतम की मुस्कान लिखूँ
बचपन मे बच्चौ से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँ
सागर सा गहरा हो जाॐ या अम्बर का विस्तार लिखूँ
वो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ
सावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की मै बरसात लिखूँ
गीता का अॅजुन हो जाॐ या लकां रावन राम लिखूँ॰॰॰॰॰
मै हिन्दू मुस्लिम हो जाॐ या बेबस ईन्सान लिखूँ॰॰॰॰॰
मै ऎक ही मजहब को जी लुँ ॰॰॰या मजहब की आन्खे चार लिखूँ॰ ND
Nakul varma said
4…………रंग घुले है हवा में
मैंने रंगों रंगीनियों को कागज़ पर खिलते देखा
आवाज़ दिखती है फिजा में
मैंने मखमली आवाज़ को कागज़ पर चलते देखा
महक दिल से दिल तक समाती है
मैंने रूह की खुशबू को कागज़ पर महकते देखा
ख्वाबों से उतर के परीयाँ आती हैं
मैंने फरिश्तों को कागज़ पर उतरते देखा
बहुत सुना है मंदिर में सुकून है
मैंने लफ्जों से कागज़ पर मंदिर बनते देखा
बाग़ में मुरझाने की दहशत में हर फुल है
मैंने बगीचों को बेखौफ कागज़ पर चलते देखा
दर्द का ख़ुशी का जाम भर भर के पीया है मैंने
मैंने ज़िन्दगी को कागज़ पर झलकते देखा
Nakul varma said
परिन्दो को कभी क्या , माँ ने उड़ना सिखाया था ,
उन्हे तो बस किसी शाख से गिरकर बताया था ।
तुम्ह भी चुप चाप चले आये हो महफ़िल से ,
तुम्हे भी क्या उसी ने जाम पिलाया था ।
हमे अब गम से दहशन नहीं कोई,
मिला के दर्द ,जाम खुशी का पिलाया था ।
शहर की गलियों के कुत्ते भी पहचान जाते ,
हिज्र के दिन किसने साथ निभाया था ।
संवर के टूट जाना है मुक्द्दर, मगर देखो ,
मेरे टूटे नसीबो पर वो भी मुस्कुराया था ।
सुना है बेवफा का तमगा दे गया वो ,
अन्धेरी रात उसने भी ये ’दीप’ जलाया था ।
Nakul varma said
…..कल तुम गुजर रहे थे ,
या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था ….
कल आहट थी कोई पहचानी ,
या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था ….
कल चाँद था फलक पर ,
या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था ….
मैने बहुत रोका मगर ,
वो ना था ना नज़र आरहा था ….
पागल दिल था शायद तुझे ,
तुम्हे हर शे में पा रहा था
bhairawi said
ati sundar …………mast
Nakul dev varma said
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है,
मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है !!!
समुँदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आसुँ प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता ,
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता !!!
मुहब्बत एक एहसानों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूँ हैं
जो तू समझे तो मोती है जो न समझे तो पानी है !!!
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हँगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पला बैठा तो हँगामा,
अभी तक डूब कर सुनते थे हम किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हक़ीक़त में बदल बैठा तो हँगामा !!!………NAKUL DEV
Nakul dev varma said
किसी को इतना याद न कर
कि जहा देखो वोही नज़र आये
राह देख देख कर कही ऐसा किसी के इतने पास न जा
के दूर जाना खौफ़ बन जाये
एक कदम पीछे देखने पर
सीधा रास्ता भी खाई नज़र आये
किसी को इतना अपना न बना
कि उसे खोने का डर लगा रहे
इसी डर के बीच एक दिन ऐसा न आये
तु पल पल खुद को ही खोने लगे
किसी के इतने सपने न देख
के काली रात भी रन्गीली लगे
आन्ख खुले तो बर्दाश्त न हो
Nakul dev varma said
क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता
सच ये है के जैसा चाहो वैसा नही होता
कोई सह लेता है कोई कह लेता है क्यूँकी ग़म
कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता
आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे
यहाँ ठोकर देने वाला हैर पत्थर नही होता
क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से हारे बैठे हो
इसके बिना कोई मंज़िल, कोई सफ़र नही होता
कोई तेरे साथ नही है तो भी ग़म ना कर
ख़ुद से बढ़ कर कोई दुनिया में हमसफ़र
नही होता…..nakul
Nakul dev varma said
एक सितारा बनो जगमगाते रहो. ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
***************************************
दर्द कैसा भी हो आँख नम न करो, रात काली सही कोई गम न करो
एक सितारा बनो जगमगाते रहो. ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
बाँटनी है अगर बाँट लो हर ख़ुशी. गम न ज़ाहिर करो तुम किसी पर कभी
दिल की गहराई में गम छुपाते रहो, ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
अश्क अनमोल है खो न देना कहीं, इनकी हर बूँद है मोतियों से हसीं
इनको हर आँख से तुम चुराते रहो, ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
फासले कम करो दिल मिलाते रहो, ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
NAKUL DEV….
Nakul dev varma said
लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती,
बस एक माँ है जो कभी खफ़ा नहीं होती।
इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।
मैंने रोते हुए पोछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुप्पट्टा अपना।
अभी ज़िंदा है माँ मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है।.dev
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।
ऐ अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया,
माँ ने आँखें खोल दी घर में उजाला हो गया।
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं
मां से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ।
Nakul dev varma said
जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल एक ऐसा इकतारा है,
जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.
झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर,
तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है.
जो धरती से अम्बर जोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
जो शीशे से पत्थर तोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
कतरा कतरा सागर तक तो ,जाती है हर उमर मगर ,
बहता दरिया वापस मोड़े , उसका नाम मोहब्बत है .
पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना ?
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर अधिकार क्या करना ?
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में हैं,
जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना ?
बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन,
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तनचंदन,
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है,
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन.
तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ,
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ,
तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन,
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ
Nakul dev varma said
समझा दो अपनी यादों को!
वो बिना बुलाये पास आया करती है!
आप तो दूर रहकर सताते हो मगर!
वो पास आकर रुलाया करती है!
बिखरे है अश्क,कोई साथ नहीं देता, खामोश है सब,
कोई आवाज़ नहीं देता,
कल के वादे सब करते है,
मगर क्यों? साथ हमारा कोई आज नहीं देता..nakul dev
मुस्कराहट सी खिली रहती है आँखों में कहीं
और पलकों पे उजाले से छुपे रहते हैं
होंठ कुछ कहते नहीं, काँपते होंठों पे मगर
कितने खामोश से अफ़साने रुके रहते हैं…
deepak said
कल आहट थी कोई पहचानी ,
या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा (रहा) था ….
मैने बहुत रोका मगर ,
वो ना था ना नज़र आरहा (आ रहा) था ….
rajesh khore said
bahut khub
SinghStyleStudio said
Nice one…
deepak said
solid vichar hain,