शहरों का बच्चा है
Posted by hemjyotsana "Deep" on June 10, 2009
रंग महौब्बत का है
ताउम्र चमकता रहता है ।
इस नगरी में जादु है
गुलाल बरसता रहता है ।
क्या तुम से मिलता है ?
एक दिवाना भटकता रहता है ।
बचपन जिसके साथ है
वो हर पल चहकता रहता है ।
शाख से गिरता है
और भटकता रहता है ।
शहरों का बच्चा है
माँ को तरसता रहता है ।
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दिल रात दिन रोशन है
“दीप” जलता रहता है ।














Shyamal Suman said
शहरों का बच्चा है
माँ को तरसता रहता है ।
तथाकथित आधुनिकता के ऊपर अच्छा प्रहार। वाह।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
http://www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
M Verma said
बहुत खूब –
आशा का दीप जलाये रखने के लिये
सुन्दर
दिनेशराय द्विवेदी said
सुंदर रचना है, बधाई!
tanu said
beautifully painted pain….!!
sanjay vyas said
शहरों का बच्चा है
माँ को तरसता रहता है ।
panktiyaan gahre arth sanjoye hain
कौतुक said
Sundar.
Satish Chandra satyarthi said
बधाई, ज्योत्सना जी.
इंतज़ार तो बहुत लम्बा करवाया आपने पर कविता पढने के बाद लगा की इंतज़ार बेकार नहीं गया..
ख़ूबसूरत कविता….. बेहद कसी हुई पंक्तियाँ……. हकीकत और कल्पनाओं को समेटे हुए…
dr ashok priyaranjan said
आधुनिक जीवन को आपने सीधे, सरल शब्दों में प्रभावशाली तरीके से काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी है । आपकी कविता का कथ्य, शिल्प, भाव और विचार सभी प्रभावित करते हैं। सूक्ष्म संवेदना को आपने बडी बारीकी से रेखांकित किया है । बधाई ।
मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-फेल हो जाने पर खत्म नहीं हो जाती जिंदगी-समय हो तो पढें और अपनी राय भी दें-
http://www.ashokvichar.blogspot.com
परमजीत बाली said
bahut sundar!!
RAMESH SACHDEVA said
कविता की जितनी भी तारीफ की जाए कम है।
वक्त की नजाकत का बयाँ अच्छा है।
उम्मीद अच्छी है, परिणाम भी अच्छा होगा।
दिल रात दिन रोशन है
‘‘दीप’’ जलता रहता है।
शाख से गिरता है, भटकता रहता है वाली बात का कुछ काव्य भाव समझ नहीं आया क्योंकि
अगली पंक्ति शहर का बच्चा माँ का तरसता रहता है बहुत खूब है।
रंग मुहब्बत का ताउम्र चमकता रहता है। काश ये भी होता ..
इस नगरी का जादू है (आज का ऐसी नगरी दिखाई नहीं देता)
कुल मिलाकर एक कविता के रूप में बहुत खूब है।
आपने अपनी शैली को जिन्दा रखा है।
harijoshin said
रंग महौब्बत का है
ताउम्र चमकता रहता है ।
इस नगरी में जादु है
गुलाल बरसता रहता है ।
always mohabbat….
sharat said
aaj aapko ’sunkar’rahat sa laga….aandhi daud main hum apno ke saath chote se khoobsoorat pallll bhoooool jaate hain…shaharon ka bacchhaaaa…saharon ki yaadein…