लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for April, 2009

कागज़ पर मंदिर

Posted by hemjyotsana "Deep" on April 1, 2009

रंग घुले है हवा में
मैंने रंगों रंगीनियों को कागज़ पर खिलते देखा

आवाज़ दिखती है फिजा में
मैंने मखमली आवाज़ को कागज़ पर चलते देखा 

महक दिल से दिल तक समाती है
मैंने रूह की खुशबू को कागज़ पर महकते देखा 

ख्वाबों  से उतर के परीयाँ आती हैं
मैंने फरिश्तों को कागज़ पर उतरते देखा 

बहुत सुना है मंदिर में सुकून है
मैंने लफ्जों से कागज़ पर मंदिर बनते देखा 

बाग़ में मुरझाने की दहशत में हर फुल है
मैंने बगीचों को बेखौफ कागज़ पर चलते देखा 

दर्द का ख़ुशी का जाम भर भर के पीया है मैंने
मैंने ज़िन्दगी को कागज़ पर झलकते देखा

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