रंग घुले है हवा में
मैंने रंगों रंगीनियों को कागज़ पर खिलते देखा
आवाज़ दिखती है फिजा में
मैंने मखमली आवाज़ को कागज़ पर चलते देखा
महक दिल से दिल तक समाती है
मैंने रूह की खुशबू को कागज़ पर महकते देखा
ख्वाबों से उतर के परीयाँ आती हैं
मैंने फरिश्तों को कागज़ पर उतरते देखा
बहुत सुना है मंदिर में सुकून है
मैंने लफ्जों से कागज़ पर मंदिर बनते देखा
बाग़ में मुरझाने की दहशत में हर फुल है
मैंने बगीचों को बेखौफ कागज़ पर चलते देखा
दर्द का ख़ुशी का जाम भर भर के पीया है मैंने
मैंने ज़िन्दगी को कागज़ पर झलकते देखा













