दीप , दीप क्यूँ हैं ?
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on मार्च 2, 2009
मैं खडी़ की खडी़ रह गई और मेरे साथ वाले मुझ से कौसों आगे निकल गये । मुझ से बहुत पीछे वाले भी आगे बढ़ते रहे और मैं…… वहीं की वहीं ।
ना जाने जिन्दगी क्या चाहती थी । उस अन्धेरे से भरी जिन्दगी में कुछ साथ रुकने को तैयार नहीं … बस मैं और अन्धेरा और अन्धेरे में फ़ैला मेरा ही साया ।
उस अन्धेरे में मैनें एक घर बनाया बिल्कुल रोशनी से भरा हो जैसे….. बहुत वक्त उस घर को अपना समझा और हकीकत समझा…….. और एक दिन एक रोशनी कुछ पल को आई और बता गई कुछ भी नहीं हैं ।
जिन्दगी की एक अजीब सी उस बेबसी को १ साल तक बस देखा और देखती रही । ना कुछ किया जा सकता था ना कुछ किया ।
सुना करती थी कि एक लड़की हुआ करती मुझ जैसी बिल्कुल मुझ जैसी ……. बहुत खुश मिजाज हर समस्या का समाधान था उसके पास , उस के आस पास गम आता तो था पर खो जाता था । लेकिन जिन्दगी तो ना जाने क्या चाहती थी ।
उसी दौर में मैनें अन्धेरे में मिट्टी उठाई और एक दीप बनाया ………
फ़िर देखते ही देखते वो दीप जलने लगा ।
बस फ़िर क्या था सुबह शाम दिन रात उसी को देख देख कर वक्त निकाला ।
जिन्दगी में कुछ बदला नहीं था उस अन्धेरे में कोई आज भी नहीं रुकता पर वो दीप आज भी मेरे साथ हैं ।
मुझे बिखरने से बचाता है । मेरी बातें सुनता है । मुझ से बातें करता हैं ।
उस ने मुझे कई बार खोने से बचाया । मैं हालातों में जब अपने आप को भुलने लगती हूँ वो मुझे अपने आप से मिला जाता है ।
मुझ से कई बार पुछा गया हैं कि मैने अपना नाम दीप क्यूँ रखा हैं । इसका कारण यही है ।
मैने दीप को जिन्दगी के हर दौर में हर हाल में सिर्फ़ अपना काम करते देखा है । दीप ना कुछ कहता है ना सुनता है । बस अपना काम करता जाता है ।
मन्दिर में इबादत करता है । मातम में उम्मीद जलाये रखाता है । दीवाली में खुशाहाली , अन्धेरे में रोशनी , राह में सही रास्ता ।
वो दीप जो रोशनी का साथी तो हैं मगर साथ अन्धेरे का भी देता है । वो दीप जो सब को रोशनी बाटँता है मगर अपने दामन में अन्धेरे को पनाह देता है । वो दीप जो बाती को वो मुकाम देता है जहाँ उसका जीवन सफ़ल हो जाये ।
मैं वही दीप बनना चाहती हुँ । वो दीप जो मैनें अन्धेरे में बनाया था आज मेरी जिन्दगी हैं । उस दीप का नाम “लम्हे ज़िन्दगी के ” ।
और आज उस दीप को जलते हुऎ २ साल हो चले ।
मेरे शब्दो में वो ताकत नहीं जो उन ३ सालो को या पिछले 9 सालो को बयान कर सके …….. पर आज अगर मैं हुँ तो उसकी एक सबसे बडी वजह लम्हे जिन्दगी के है जिसने मुझे उस मुश्किल दौर से सम्भाला ।
और लम्हे जिन्दगी के आप सब की वजह से ….. आप सब पढ़ने वालों की वजह से हैं । आप सब अगर पढ़ते नहीं तो मैं इसे बरकार नहीं रखा पाती ।
इस लिये शुक्रिया आप सब का ।
सादर
हेम ज्योत्स्ना “दीप”
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sameer lal said
अरे वाह!! इस दीप को जलते दो साल हो गये. बहुत बहुत बधाई. ऐसे ही यह बरसों बरस जलता रहे और चिट्ठाजगत को रोशन करता रहे, यही शुभकामनाऐं.
Pragya said
ye ‘Deep’ hamesha jalta rhe , yahi dua hai humari.
2 saal pure hone par bhut bhut badhayi hem.
itisharma said
मन्दिर में इबादत करता है । मातम में उम्मीद जलाये रखाता है । दीवाली में खुशाहाली , अन्धेरे में रोशनी , राह में सही रास्ता ।
isi tarah aap bhi hamesha deep hi bane rehan aur apna yeh kaam – blog dwara ummeed ka sandesh – dete rehna
महावीर शर्मा said
दो वर्षों तक ‘दीप’ का प्रकाश सारे ब्लाग-जगत में फैलता रहा है। वैसे तो ‘दीप’ की ज्योति ११ वर्ष की आयु में ही जला दी थी। दो वर्षों में अनेक सुंदर रचनाएं पढ़ने को मिली हैं।
‘दीप’ की ज्योति इसी तरह साल दर साल ऐसे ही फैलती रहे। तुम्हारी ही कुछ पंक्तियां
दे रहा हूं:
दीप तू अब रोशन हो ,
घनघोर अन्धेरे या ,
जगंल सा बिहड़ मन हो ,
दीप तू अब रोशन हो ।
चिट्ठ जगत में दो वर्ष के सफलपूर्वक सफ़र पर बधाई।
gkindian said
आपके ब्लॉग में बहुत कुछ पड़ने को है. आप् बहुत अच्छा लिखतीं हैं
खासकर निम्न पंक्तियां बहुत ही अच्छी हैं.
दीप तू अब रोशन हो ,
घनघोर अन्धेरे या ,
जगंल सा बिहड़ मन हो ,
दीप तू अब रोशन हो ।
धन्यवाद
दीपक जलता रहे
जिन्दगी रोशन होती रहे
ये कारवां यू ही चलता रहे ……………….
amit said
es deep ki jyoti jalate rehna ,
blog ki dunia sajate rehna ,
hum yuh hi roj dalenge tel deep mein ,
bus ek vinti hein ke
aap humhe or humein aap yaad aate rehna !
amit rohela
noida
amit_rohela001@gmail.com
santhosh said
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Jai…Ho….
(bhootnath)rajeev thepra said
आपका दो-साला सफ़र के बारे में पढ़ा….थोडा-सा देखा भी….अब मैं अपने छोटे से मुहँ से क्या कहूँ कि आपका लेखन तो अच्छा है…..थोडा और और अच्छा हो जाए….तो आप छा जाएँ….सच….बेशक मैं तो पहली बार आया हूँ यहाँ…..और अब बार-बार भी तो आना होगा….जैसे सीढ़ी-दर-सीढ़ी हम ऊपर चढ़ते हैं….वैसे ही कुछ और-कुछ और बेहतर की कामना भी तो करते हैं….वैसी ही अपेक्षा मेरी आपसे भी है….!!
(bhootnath)rajeev thepra said
आपके ब्लॉग पर अक्षर बेहद छोटे हैं…..इन्हें थोडा बड़ा करें प्लीज़….!!
renudeepak said
smaratiyan abhi baaki hain,
hansi abhi shesh hai ,
dukhant abhi nahi hua hai ,
dukhon par muskurana
abhi shesh hai…….
in paktiyon ke saath aapko ‘lamhe jindgi ke ‘ ke do saal pura karne par badhayi …aap yunhi likhti rahen …best of luck HEMJYOTSANA JI….
suruchi said
bravo…….
aap ka sapna hai jaroor poora ho Mahendera Rajoriaya Shivpuri (M.P) said
hello mahaveer sharma iam mahendra rajoriya from shivpuri mp
Mahendera Rajoriaya Shivpuri (M.P) said
jindgi mai kuch log yaade chod jaate lekin unki yaaden hamesa yaad aati hai aapki is kabiota par muje apne bachpan ki yaad aati hai bo syam ka dhalta hua suraj ek ehsas chod jata hai ki naye subh hogi
Mahendera Rajoriaya Shivpuri (M.P) said
raho mai kabhi uski yaad aati hai to apne aapko tham leta hoo lekin kabhi uski jindgi mai koi naya mod pata hoo to usko pane ki koshis karta is kosis mai apne aap ko bhool jata hoo ki mai kya hoo sirf ak insaan hai mahendra rajoriya shivpuri mp
Mahendra Rajoriya said
uski aanko ke hi sabalon ka jabab dene se bhi kya fayda kyuki bah to mere hi needo ko satati hai
mahendra rajoriya
aapki kabita ki is ada par mai fidha hoon
Mahendra Rajoriya shivpuri mp said
pyaar karna ek jindgi ka kasoor hai is kasoor ko samja bhi ek kasoor hai mahendra
Mahendra Rajoriya shivpuri mp said
Mai mahendra Rajoriya ek poor family se hoon mera sapna hai ki mai apne mata pita ka naam roshan karoon mai aapki kabita ko padne ke baad bilkul bhi apne aapko aapki kabita mai dekhta hoon
mahendra rajoriya shivpuri mp said
jindgi ki is raah mai akela pad jane ke gum se darta hoon.
teri rahoon mai badnaam hone se darta hoon.