लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

तुम वो बहर बनो

Posted by hemjyotsana "Deep" on February 20, 2009

मेरे ज़िन्दगी के सफर में तुम
मेरी चाह है हमसफ़र बनो
यही ख्वाब है मेरा एक
हर नजारा तुम हर नजर बनो |

जहाँ हो वफ़ा हर शाम में ,
जहाँ ज़िन्दगी हर जाम में ,
जहाँ चाँदनी हर रात हो ,
उम्मीद की हर सहर बनो |

मैं नहीं काबिल तेरे बना ,
तू फलक मैं गर्दिश भला !
तू पूनम , मैं मावस की रात ,
नही बने मेरे वास्ते मगर बनो |

नही मेरे लिखने में वजन कोई
नही साज पर कोई गीत चढा |
ना लिख सका कोई ग़ज़ल ,
गुनगुना सकूँ तुम वो बहर बनो |

मेरी नही पतवार कोई
मेरा नही माझी कोई
मैं हूँ तन्हा मंझधार में ,
कश्ती को दे किनारा वो लहर बनो |

11 Responses to “तुम वो बहर बनो”

  1. sameer lal said

    बहुत उम्दा रचना बन पड़ी है, वाह!!

  2. वाह ज्योत्सना जी बहुत अच्छी कविता लिखी है


    सरकारी नौकरियाँ
    गुलाबी कोंपलें

  3. shukriya Sameer jee ,
    that was a typing mistake.

  4. द्विजेन्द्र द्विज said

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है
    लेकिन

    बरबस ही दुष्यंत कुमार का शेर याद आ गया

    वे सहारे भी नहीं और जंग लड़नी है तुझे
    आज अपने बाज़ुओं को देख पतवारें न देख

  5. mehek said

    जहाँ हो वफ़ा हर शाम में ,
    जहाँ ज़िन्दगी हर जाम में ,
    जहाँ चाँदनी हर रात हो ,
    उम्मीद की हर सहर बनो |

    waah bahut sundar

  6. hari said

    hem samarpan aur ek nishthtaa kaa yah geet ati sundr hai.

  7. बहुत सुंदर नज़्म है।
    यह पंक्तियां बहुत पसंद आईं:
    नही मेरे लिखने में वजन कोई
    नही साज पर कोई गीत चढा |
    ना लिख सका कोई ग़ज़ल ,
    गुनगुना सकूँ तुम वो बहर बनो |
    महावीर शर्मा

  8. muflis said

    मेरी नहीं पतवार कोई , मेरा नहीं मांझी कोई
    मैं हूँ तनहा मझदार में , कश्ती को दे किनारा वो लहर बनो

    मन को छू लेने वाली अछि पंक्तियाँ
    रचना में कला पक्ष भी उजागर हो रहा है …
    बधाई स्वीकारें . . . . .
    —मुफलिस—

  9. लाजवाब कविता.
    पहली बार आपके ब्लॉग पर आया. बहुत अच्छा लगा
    शुभकामनाएं

  10. inkblacknight said

    सुंदर ! बस, यहीं लब्ज आया जुबांपे …

    http://asachkahitari.wordpress.com/

  11. Avinash said

    Dear friend
    Excellent compose
    smooth and gently involved word
    all the best

    with regards
    Avinash

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