जिंदगी कई बार

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जिंदगी कई बार हमें अंधेरे में लाके छोड़ देती है |
दर्द में बेहाल बेबस छोड़ देती है
ना मैं नज़र आता हूँ ना रास्ता नजर आता है
दूर तक बस अँधेरा नज़र आता है
तड़पता हूँ रोता हूँ
झड़ता हूँ बिगड़ता हूँ
फ़िर लाचार सा गिर जाता हूँ
ठोकरों के शहर में बिना मरहम दिल तोड देती हैं
जिंदगी कई बार अंधेरे में लाके छोड़ देती है
सोच के कुछ घोडे दौड़ने लगते है
छुटे साथी , जी को झंक्झोरने लगते है
फ़िर अचनाक से एक हीरा चमकता है
अंधेरे में रोशन सा नज़र आता है
उसे पाके मैं मचल पड़ता हूँ
उसी अंधेरे में चल पड़ता हूँ
रोशनी मिलती है हौसला मिलता है
रास्ता जैसे कदमो के साथ चलता है
बदलता कुछ नही पर सब कुछ बदलता है
जानते है वो हीरा कौन है ?

वो हीरा मैं हूँ और वो अँधेरा कोयले की खान है
जिंदगी बस कुछ देर मुझे मेरे साथ अकेला छोड़ देती है |

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19 responses »

  1. कलम से जोड्कर भाव अपने
    ये कौनसा समंदर बनाया है
    बूंद-बूंद की अभिव्यक्ति ने
    सुंदर रचना संसार बनाया है
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    http://www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    http://www.chitrasansar.blogspot.com

  2. bahut khoob,

    ठोकरों के शहर में बिना मरहम दिल तोड देती हैं
    जिंदगी कई बार अंधेरे में लाके छोड़ देती है.

    रोशनी मिलती है हौसला मिलता है
    रास्ता जैसे कदमो के साथ चलता है.

    poori kavita me y chaar panktiyo ne maza laa diya..sundar abhivaykti he aapki
    likha kare..me padta rahunga

  3. रोशनी मिलती है हौसला मिलता है
    रास्ता जैसे कदमो के साथ चलता है
    बदलता कुछ नही पर सब कुछ बदलता है
    I think the above lines are good but I feel that You completed it in a hurry.???????

  4. Hemjyotsana jee Saprem Namaste!
    Apki kavita ko parha. Antarman ko khil utha….. bhav vihval hua. Apko humari bahut-bahut subhkamnayein. Bhagwan apki kalam ko aur dhar de…… Maa Sarswati apki ish sahitya vikas ki yatra ko aur prakash de…….! Likhte rahiye Hemjyotsana jee…..! Apki ujjval bhavisya ki mein kamana karta hu.
    Mein Himachal Pradesh Univrsity, Shimla Ke History Depatment mei Asstt. Professor hu. Aap apne bare mei bhi mujhe batane ki kosis karengi ki aap kis institution mei aur kaha work kar rahin hain . Aap agar apni kvita aur baki lekhani ko mere email par bhejti rahengi toe mujhe bahut khusi hogi. Mein apke email ka intejar karunga. Mera email:
    Dhanyavad.
    Apka Subhakankshi
    Arun Singh,
    Shimla.

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