हौसलों के देश में
Posted by hemjyotsana "Deep" on January 25, 2009
एक कदम ही रखा ,हो खडा़ महल गया ,
दिल मेरा सम्भल गया , टूट कर सवरं गया ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
देश है ये इक नया , इक अलग जहाँन है ,
हारता नहीं कोई , जीत ही मुकाम है ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
ना कहीं जमीन है , ना कहीं मकान हैं ,
रोग इक नया लगा चैन और सुकून का ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
उठ खडे़ सभी हुऎ , गिर गये थे जो कहीं ,
दौड़ ने सभी लगे ,चल सके ना थे कभी ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
फ़ूल थे ना खार थे , शब्द थे ना बाण थे ,
हर तरफ़ जुनून था , काम का सुकून था ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
फ़िजुल था ना वक्त , काटनी उम्मीद की फ़सल जो थी ,
ना कोई जंग थी ,दोस्ती की नसल जो थी ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
सपना है मेरा, मेरा देश हो हौंसलों के देश सा ,
बने मेरा देश भी हौंसलॊ के देश सा ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।














sameer lal said
बने मेरा देश भी हौंसलॊ के देश सा ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
-आमीन!
गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनाऐं.
संगीता पुरी said
बने मेरा देश भी हौंसलॊ के देश सा ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
बहुत अच्छा….बहुत बहुत बधाई।
महावीर said
सपना है मेरा, मेरा देश हो हौंसलों के देश सा ,
बने मेरा देश भी हौंसलॊ के देश सा ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
सपने अवश्य पूरे होंगे। सारे भारतीयों का यह सपना है।
सुंदर रचना है।
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।
tarun goel said
Rohit Jain asked me to visit your page for better poetry
I have read all your poems and I am delighted.
Life is beautiful.
kanishka said
its beatiful but may u have not repeated the last line twice , it would have been much better…:)
विनय said
सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें!
प्रमोदपाल सिंह said
सुंदर रचना है।
Iti Sharma said
इंशा अल्लाह !!! अगर आपके जैसे कुछ कवि और हो जाएँ तो हमारा देश भी होसलों का देश हो जाएगा
nirmla.kapila said
bane mera desh bhi hausalon ke desh saa—-bahit hi sunder likha hai bdhaai
SARWAR (S A ANSARI) said
देश है ये इक नया , इक अलग जहाँन है ,
हारता नहीं कोई , जीत ही मुकाम है ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
उठ खडे़ सभी हुऎ , गिर गये थे जो कहीं ,
दौड़ ने सभी लगे ,चल सके ना थे कभी ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
Above lines are really well written but I request u to change the following one, if possible. Pl don’t take it otherwise. I want to see your poetries in perfection.
फ़िजुल था ना वक्त , काटनी उम्मीद की फ़सल जो थी ,
ना कोई जंग थी ,दोस्ती की नसल जो थी ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
सपना है मेरा, मेरा देश हो हौंसलों के देश सा ,
बने मेरा देश भी हौंसलॊ के देश सा ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
Good Luck…..!!!!!!!!
mehek said
फ़ूल थे ना खार थे , शब्द थे ना बाण थे ,
हर तरफ़ जुनून था , काम का सुकून था ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
waah bahut khubsurat,dil mein ek umang bhar gayi.