एक कदम ही रखा ,हो खडा़ महल गया ,
दिल मेरा सम्भल गया , टूट कर सवरं गया ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
देश है ये इक नया , इक अलग जहाँन है ,
हारता नहीं कोई , जीत ही मुकाम है ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
ना कहीं जमीन है , ना कहीं मकान हैं ,
रोग इक नया लगा चैन और सुकून का ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
उठ खडे़ सभी हुऎ , गिर गये थे जो कहीं ,
दौड़ ने सभी लगे ,चल सके ना थे कभी ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
फ़ूल थे ना खार थे , शब्द थे ना बाण थे ,
हर तरफ़ जुनून था , काम का सुकून था ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
फ़िजुल था ना वक्त , काटनी उम्मीद की फ़सल जो थी ,
ना कोई जंग थी ,दोस्ती की नसल जो थी ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।
सपना है मेरा, मेरा देश हो हौंसलों के देश सा ,
बने मेरा देश भी हौंसलॊ के देश सा ,
हौसलों के देश में , हौसलों के देश में ।













