गम कभी दिल के मेहमान नहीं होते ,
दोस्त कभी दिल से जुदा नहीं होते ।
हद नहीं होती किसी प्यार के पैमाने की ,
चूर नशे में मयखाने नहीं होते ।
उम्र में घाव बढ़ते रहते फ़िर भी ,
दिल से बच्चे कभी सयाने नहीं होते ।
महफ़िल में आकर आफ़त मोल ली ,
यादो में अब तेरी वीरानें नहीं होते ।
दोस्ती प्यार के अब दौर नहीं ,
सच होता तो हम दिवाने नहीं होते ।
बुते-ए-बेपीर की कैसी ईबादत ,
पत्थर कभी किसी से खफ़ा नहीं होते ।
आइने से पुछलो अक्स एक अब तेरा मेरा ,
प्यार में हम हम, तुम तुम नहीं होते ।
नशा है “दीप” तेरा आज भी उतरा नहीं ,
वरना ख्यालों के फ़साने नहीं होते ।













