लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

बेहाल ज़िन्दगी के

Posted by hemjyotsana "Deep" on January 5, 2009

पन्नों में जल रहे थे कुछ साल ज़िन्दगी के ,
धुआँ धुआँ से हो गये कई ख्याल ज़िन्दगी के ।

एक तेरी याद है बस जो दिल बेहलाती है ,
वरना सताते हैं हमे कई सवाल ज़िन्दगी के ।

वफ़ा मोहब्बत में ,दोस्ती में बेवफ़ाई ,
होते है कई तजूर्बें बेमिसाल ज़िन्दगी के ।

हंसते चेहरे जलते पावं , नदिया चिडियाँ गावं ,
हर पल नजर आते हैं कमाल ज़िन्दगी के ।

शाम से सुबह ,सुबह से रात का सफ़र ,
मालिक हैं हम ऎसी बेहाल ज़िन्दगी के ।

16 Responses to “बेहाल ज़िन्दगी के”

  1. panno me jal rahe kuch kheyaal jindgi ke—– bahut he badiyaa likh bdhaai

  2. sameer lal said

    हंसते चेहरे जलते पावं , नदिया चिडियाँ गावं ,
    हर पल नजर आते हैं कमाल ज़िन्दगी के ।

    -बहुत बेहतरीन..वाह!!

  3. prashant said

    हंसते चेहरे जलते पावं , नदिया चिडियाँ गावं ,
    हर पल नजर आते हैं कमाल ज़िन्दगी के ।
    bahut achhi lines..

  4. Dwijendra Dwij said

    पन्नों में जल रहे थे कुछ साल ज़िन्दगी के,

    ग़ज़ल में आपकी रुचि को सलाम

  5. sonam shah said

    waah kya khoob likhti hain aap

    हंसते चेहरे जलते पावं , नदिया चिडियाँ गावं ,
    हर पल नजर आते हैं कमाल ज़िन्दगी के ।

    शाम से सुबह ,सुबह से रात का सफ़र ,
    मालिक हैं हम ऎसी बेहाल ज़िन्दगी के । …. majaa aagya.
    likhti rahiye

  6. पन्नों में जल रहे थे कुछ साल ज़िन्दगी के ,
    धुआँ धुआँ से हो गये कई ख्याल ज़िन्दगी के ।

    शाम से सुबह ,सुबह से रात का सफ़र ,
    मालिक हैं हम ऎसी बेहाल ज़िन्दगी के ।

    बहुत खूब भावाभियक्ति ….हार्दिक बधाई..सस्नेह..

  7. Raj said

    Your Blog is so rich.A Nice spot for poet lover.

  8. sapna said

    bam bam bole masti main dole hole hole. I mean Good Luck with your site. Thanks

  9. पन्नों में जल रहे थे कुछ साल ज़िन्दगी के ,
    धुआँ धुआँ से हो गये कई ख्याल ज़िन्दगी के ।

    वाह! भावों से ओतप्रोत रचना है। बहुत सुंदर।

  10. wah bahi wah …marm sparshi kavita likh de aapne tou . mazza aa gaya padh ke

  11. विकास श्रीवास्तव said

    नमस्ते ज्योत्सना जी,

    कुछ कह कर आपकी कविता का स्तर नही गिराना चाहता………क्यों कि मेरे पास इतनी अच्छी कविता के लिये इतने अच्छे शब्द है ही नही………अभी कुछ दिनो पहले कोटा आना हुआ था पहले अगर कही आपकी अभिव्यक्ति पढ ली होती तो आप से मिल कर ज़रूर आता…
    भविष्य मे भी आप ऐसा ही अच्छा अच्छा लिखती रहेगी इस शुभेक्षा के साथ आपका प्रशन्शक

    विकास श्रीवास्तव
    भिण्ड
    +919893308324

  12. विकास श्रीवास्तव said

    vikash.shrivastava@yahoo.com
    unique.vikasshrivastava@gmail.com
    पर लगभग हमेशा ही online होता हू……………बडी खुशी होगी अगर आप कभी मिले
    वैसे रोमानियाँ तो बहुत देखी हैं पर आपकी कविता मे जो कटाक्ष देखने को मिला वो वाकयी स्मरण रखने लायक है

  13. balram said

    ultimate

  14. balram said

    pata nahi kabhi -2 jab akele hoten h tab ahsas hota h in sabhi baton ka jinhe apne bahut hi sunder tarik se shabdon m piroya h is tarah ki kavita padhk rahat mahsus hoti h

  15. mahesh baheti said

    शाम से सुबह ,सुबह से रात का सफ़र ,
    मालिक हैं हम ऎसी बेहाल ज़िन्दगी के

  16. hey bhut acchl ikha ha apne

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