बापू का ख़त
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on दिसम्बर 11, 2008
प्रिय देशवासियों ,
मैं यहाँ स्वर्ग में कुशल-मंगल हूँ आशा करता हूँ भारत में भी सब कुशल-मंगल ही होगा ।
इन दिनों सुभाष के कई शिष्ये ( शहीद ) आये और मंगल भगत भी वापस आने की तैयारी में लग रहे हैं तो मुझे लगा देश में सब थीक तो है या नहीं ?
आज देखा तो पता लगा मेरे देश में तो सब मेरे सिध्दांत आँख बन्द कर के माने जा रहे । कोई एक शहर में धमाके करता हैं तो आप उसे दुसरे शहर को आगे कर देते हो । जयपुर के बाद दिल्ली फ़िर कोई और अब मुम्बई के बाद किस्से बरबाद करवाने वाले हो ?
मेरे नाम पर क्या अपनी बेबसी मजबूरी कमजोरी छुपा रहे हो ? ये तो नहीं था मेरे सिध्दांत । मेरे और मेरे साथियों के बलिदान का यही मतलब निकाला है आपने सबने । पर इस बार शायद में नहीं आउंगा और आ भी गया तो शायद आजाद ना करा पाउँ ।
मुझे माफ़ करो , अपनी नाकमी को अहिंसा नाम मत दो ।
आपका अपना ,
बापू














ghughutibasuti said
बहुत बढ़िया ! हमने तो पहले ही ‘मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी’ अपना नारा बना रखा है । कमजोर की अहिंसा को अहिंसा नहीं कहा जाता मजबूरी कहा जाता है ।
घुघूती बासूती
Saurabh Sharma said
Its Really Correct.. We just hide our pusillanimity in name of Gandhi Ji… but upto when……..
sameer lal said
अपनी नाकमी को अहिंसा नाम मत दो ।
-बिल्कुल सही!!
mehek said
bahut sahi bolte bapu
dr ashok priyaranjan said
अच्छा िलखा है आपने । जीवन के सच को प्रभावशाली तरीके से शब्दबद्ध िकया है । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है -आत्मिवश्वास के सहारे जीतें िजंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-
http://www.ashokvichar.blogspot.com
Sant Sharma said
Aapki bhawana ko vyaqt karne ka yeh aandaj achcha laga.
deepak said
baapoo ki dard bharii dastan dil ko chhoo gai, mujhe apne aap par sharm aa rahi hai