नया साल आप सबके जीवन में नई ख़ुशियाँ लेकर आए।
आप सपरिवार स्वस्थ और सानंद रहें ।
आप सभी को सदैव सफलता मिले ।
हेम ज्योत्स्ना “दीप”
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 30, 2008
नया साल आप सबके जीवन में नई ख़ुशियाँ लेकर आए।
आप सपरिवार स्वस्थ और सानंद रहें ।
आप सभी को सदैव सफलता मिले ।
हेम ज्योत्स्ना “दीप”
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Posted by hemjyotsana "Deep" on December 27, 2008
मीलों चलता चलता जब में थक जाता हुँ
रुकता हुँ दम भर को ,
क्या सब रुक जाते है ?
खुशियों के कई ढेर लगा कर में हसंता रहता हूँ
मुस्काता हुँ खो जाता हूँ ,
क्या सब खो जाते हैं ?
बादक के मतवारे मौसम में बह जाता हुँ ,
ठंडी हवा में उड जाता हूँ ,
क्या सब उड़ जाते है ?
मेरे सपने मिलकर मुझसे जब खो जाते है
मैं ड़र जाता हूँ ,रो जाता हूँ ,
क्या सब रो जाते है ?
देख कर अपनो को खुश होता हूँ ,
एक ही रंग में रगं जाता हूँ ,
क्या सब रगं जाते हैं ?
दुनिया के सब करतब देख में हैरान रह जाता हूँ ,
जादू सी दुनिया में जादू सा हो जाता हूँ
क्या सब हो जाते हैं ?
चोट जब दिल को लगती है टूट जाता हूँ ,
लड़ता हूँ , अल्लाह अल्लाह करता हूँ ,
क्या सब करते है ?
क्या में जो जो करता हूँ सब करते है ?
जीवन के सुख-दुख मे कठपुतली से ,
क्या सब हो जाते हैं ?
मासुम सा बच्चा हूँ इन्सान के दिल में बसता हूँ ,
मेरे कारण दीप इन्सान कहलाता है ,
क्या सब कहलाते है ?
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Posted by hemjyotsana "Deep" on December 24, 2008
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Posted by hemjyotsana "Deep" on December 22, 2008
लता मंगेशकर हमारी लता जी कभी नहीं बनती । आशा दी को हम कभी नहीं पहचान पाते । शोभा मुदगल , नूर जहाँ , शमशाद बेगम , आबीदा परवीन ,कविता कृष्णमुर्ति इन्हे कोई नहीं जानता कोई नहीं सुनता । लेकिन रफी साहब रफी साहब ही रहते किशोर कुमार के दिवाने कम नहीं और ज्यादा होते ।
शुक्र है तब Reality Show नहीं होते थे । शुक्र है तब जनता के पास मोबाईल नहीं थे । शुक्र है तब बेसुरी जनता गायको की जिन्दगी का फ़ैसला नहीं लेती थी ।
कुछ सालों में हमारे देश में Reality shows का बहुत बोलबाला है जहाँ देखो बस संगीत ही संगीत । लेकिन कमाल की बात है लता मंगेशकर जिस देश में जन्मी वहाँ एक भी लड़की कभी कोई प्रतियोकिता नहीं जीती ।
क्या आप जानते है क्यूँ ? यदि हाँ तो बताईयेगा ।
क्या हमारे देश में आज भी लड़कीयों को पसंद नहीं किया जाता ? किरन बेदी , कल्प्ना चावला सानिया मिर्जा कहाँ आई फ़िर ? वसुन्धरा राजे , मायावती , उमा भारती , सोनिया गांधी जैसी महियालें कैसे चुनाव जीत रही है ?
इन सबका होना ये तो साबित करता है कि भारत में महिलाऒ को कोई ऎसी बाधा भी नहीं जो उन्हे आगे बढ़ने ना दे । फ़िर भी कोई तो कारण होगा कि कोई भी लड़की कोई Reality show नहीं जीत पाती ।
जहाँ तक मेरी समझ है मोबाईल में SMS कर के सिर्फ़ और सिर्फ़ युवा वर्ग ही अपना पैसा और वक्त खराब करता है ।
तो क्या इसका मतलब ये निकाला जाये कि आज का युवा वर्ग ऎसी विचार पर हैं कि लडकी को वोट मत तो SMS मत करो ?
बात कुछ जमी नहीं । यकीन से परे हैं और फ़िर इतनी लड़कीयों के पास मोबाईल है । मतलब कारण कुछ और है । थोडा और गहराई में सोचा तो चोक पड़ी ।
मुझे एक आम ही बात लगती है लडके को सभी वोट देते है चाहे वो लड्के उसके दोस्त हो या शहर हो या राज्य वाले । अगर लड़का स्मार्ट हो ,ठीक ठाक गाता हो तो फ़िर तो बस जीतना तेया हैं क्योकि फ़िर तो उसे कोई वोट करे ना करे लडकीयाँ जरुर करेगी और तब तक करेगी जब तक वो जितना जाये अब राहुल वैद्द्य को ही ले लिजीये Indian Idol नहीं बन सका तो क्या हुआ उसे जीतवा ही दिया “जो जीता वो ही सुपरस्टार” ।
Indian Idol , Sa Re Ga Ma Pa , Voice Of India सब में कई अच्छे गायक आये पर जीते सिर्फ लड़के । ऎसा नहीं था कि लड़कीयाँ नहीं थी या अच्छा नही गाती थी पर…
इस पर के पीछे सिर्फ लडकियाँ है । हर बात पर लडकियाँ एक हो जाती है पर कभी एसा नहीं सुना के किसी लड़की को Reality Show जीताने के लिये एक हूई हो ।
जब लडकियाँ ही लडको को वोट करेगी और लड़के तो लडके को वोट देते ही हैं तो लड़कीयाँ जितेगी कैसे ?
सोचियेगा … वोट अपने पराये देख कर मत दिजिये ।
वोट Male Female देख कर मत दिजिये ।
वोट राज्य देख कर मत करिये ।
वोट चाहे चुनाव में दो या Reality Shows में, सोच समझ कर काबिलीयर देख कर दिजिये ।
वरना कोई लता किसी अपने घर में दब कर रह जायेगी । कोई आशा कभी नही गा पायेगी के “आ जा आ जा आ आ जा “
वरना किसी रफी के साथ कोई लता नहीं गायेगी “मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र… “
कोई किशोर से नहीं कहेगा “छोड़ दो आँचल “
ये सब अधु्रे रहा जायेगे….
और हम सिर्फ ” ऒ रे मांझी…. ” ही सुनते रह जाते ।
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Posted by hemjyotsana "Deep" on December 19, 2008
इक लहर सी उठी समन्दर में सैलाब आ गये,
सहर ही हुई थी हम पी के शराब आ गये ।
महफ़िल में रंग जमने को था ,
कि हम जैसे कुछ लोग ख्रराब आ गये ।
चेहरे पे शीकन आँखों मे सवाल ,
मिलते ही दोस्तो से सब जवाब आ गये ।
खुदा तेरा ही है ये जादू सारा ,
कि कांटों के साथ जो गुलाब आ गये ।
हमने मांगा था “दीप” कि रोशनी हो ,
मरने को क्यूँ पतंगे बेहिसाब आ गये ।
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Posted by hemjyotsana "Deep" on December 16, 2008
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Posted by hemjyotsana "Deep" on December 11, 2008
प्रिय देशवासियों ,
मैं यहाँ स्वर्ग में कुशल-मंगल हूँ आशा करता हूँ भारत में भी सब कुशल-मंगल ही होगा ।
इन दिनों सुभाष के कई शिष्ये ( शहीद ) आये और मंगल भगत भी वापस आने की तैयारी में लग रहे हैं तो मुझे लगा देश में सब थीक तो है या नहीं ?
आज देखा तो पता लगा मेरे देश में तो सब मेरे सिध्दांत आँख बन्द कर के माने जा रहे । कोई एक शहर में धमाके करता हैं तो आप उसे दुसरे शहर को आगे कर देते हो । जयपुर के बाद दिल्ली फ़िर कोई और अब मुम्बई के बाद किस्से बरबाद करवाने वाले हो ?
मेरे नाम पर क्या अपनी बेबसी मजबूरी कमजोरी छुपा रहे हो ? ये तो नहीं था मेरे सिध्दांत । मेरे और मेरे साथियों के बलिदान का यही मतलब निकाला है आपने सबने । पर इस बार शायद में नहीं आउंगा और आ भी गया तो शायद आजाद ना करा पाउँ ।
मुझे माफ़ करो , अपनी नाकमी को अहिंसा नाम मत दो ।
आपका अपना ,
बापू
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