लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

मन की चिड़िया

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on अगस्त 18, 2008

यह कविता महावीर जी सर के ब्लॉग पर हुए कविता सम्मलेन में शामिल हुई थी |
आज लम्हे जिंदगी के में यह लम्हा भी जुड़ गया |

मन की चिड़िया
मन की चिड़िया सावन में तन का मैल है धोये ।
देख के बादल मतवारे निकले ,होना हो जो होये ।

कभी इधर को मचले , कभी उधर को मचले,
मौसम के इस जादु में मन बावरा सा होये ।

जेठ दुपहरी ,खून पसीना एक करा सब खेत में ,
खेत खड़े सब धरती-पुत्र मेघ के संग-संग रोये ।

तितली-भँवरे , फूल-बगीचा , गांव शहर ,
हर मौसम में लगे अलग ,सावन में एकसा होये ।

रिमझिम की झड़ी जब साज उठा कर गाये ,
सब के सब ताल मिलाये , उम्र कोई भी होये ।

मिट्टी में मिल जाये गम, भुल के नाचो गाओ ,
बिखरे सपनो के पर आओ उम्मीद की फसले बोये ।

आज घिरे हैं मेघ गगन में , “दीप” जलाओ कोई,
दिन में जब-जब बरखा आई , घना अन्धेरा होये ।

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7 Responses to “मन की चिड़िया”

  1. शानदार कविता है। पर पढ़ते समय कभी कभी लय टूटती है। कुछ शब्दों को देहाती रुप दे दिया जाये तो बात बन जाती है। जैसे मैने पुत्र को पुत्तर पढ़ा तो बात बन गई। सुंदर कविता के लिए बधाई।

  2. बहुत बढिया.

    महावीर जी के यहाँ भी पढ़ी थी. :)

  3. mahaveer said

    प्रिय हेम ज्योत्स्नाजी
    नमस्ते ।
    आप के अन्तरमन द्वारा प्रस्तुति “मन की चिड़िया” कविता को आपके ब्लोग ” लम्हें जिन्दगी के” मै पढने या यू कहे तो अतिशयोक्ति नही होगी मन कि आखो ने पढा, और ह्र्दय ने महसुस किया कि आपकी इस क्रति पर आपको शुभ – कामना भेजु ।

    आज घिरे हैं मेघ गगन में , “दीप” जलाओ कोई,
    दिन में जब-जब बरखा आई , घना अन्धेरा होये ।

    उपरोक्त पक्ति सटीक लगी । वैसे ज्योत्स्नाजी आपके नाम मे ही प्रकाशमय ज्योति है । आप जेसी कविता लिखने वाली कविकार मिल गई अब घना अन्धेरा पोयटरी जगत मे असम्भव है । मेरी आपको मन से हार्दिक शुभ कामनाऐ ,
    व ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको सफल बनाये ।

    आपका अपना

    महावीर बी सेमलानी
    23.09.2008
    पत्रकार

  4. जेठ दुपहरी ,खून पसीना एक करा सब खेत में ,
    खेत खड़े सब धरती-पुत्र मेघ के संग-संग रोये

    ज्योत्सनाजी
    अगर इन पंक्तियों में धरती-सुत लगा दिया जाये तो कैसा रहेगा? वैसे कविता बहुत सुन्दर है। बधाई।

  5. praveen said

    namste bahenji kaya baat hai … मन की चिड़िया सावन में तन का मैल है धोये ।
    देख के बादल मतवारे निकले ,होना हो जो होये ।
    kaya khoob likha hai.
    aapka swagat hai. keep on.

  6. singhsdm said

    ज्योत्सना जी
    मिट्टी में मिल जाये गम, भुल के नाचो गाओ ,
    बिखरे सपनो के पर आओ उम्मीद की फसले बोये
    अच्छी ख्याल की कविता.
    दुआ है ऐसे ही आगे भी लिखती रहें.

  7. Sandesh said

    Arey bap re …..!!!

    Idhar to sab professional log hai ….!!!

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