बुखार की बातें
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on जुलाई 2, 2008
उफ़ ये निगाहे उस पे खुमार की बातें ,
ख्वाबो के प्याले ,उनके दरों-दिवार की बातें ।
कत्ल कब के हुऎ और शिकवा ना कोई
फ़िर क्यूँ हैं अब नये शिकार की बातें ।
कहाँ मुझसे दोस्ती , कहाँ मुझसे दोस्ती ,
कहाँ खुदा से प्यार की बातें ।
मुस्काते गुलाब ,महकती सांसें ,
इन पर बहार की बातें ।
ज़बां पे तला जो वो रु-ब-रू ,
फ़िर काहे तकरार की बातें ।
बच के निकले हैं जान पर बन आई ,
तॊबा तॊबा अब ना मझधार की बातें ,
दिल-ओ-जान से पुजा ,रुह तेरे नाम की ,
नहीं है ये कारोबार की बातें ।
तेरे नाम से सुबह तेरे याद की शामे ,
यही है मेरे जश्न-ए-बहार की बाते ।
रग-रग में लगा इश्क का रोग ,
हकीम करता रहा बुखार की बातें ।
गम-खुशी ,फूल-तितली , रंग-खूशबू ,
80 के साल में बेकार की बातें ।
जल गई रस्सी बल बाकी है ,
वो करते हैं मेरे सुधार की बातें ।
मैं रहूँ ना मेरा निशान रहेगा ,
होगी मगर मेरी मज़ार की बातें ।
बसा ली दिल की दुनिया अपनी ,
भरी महफ़िल में मुझसे प्यार की बातें ।
उजाड़ दी बस्ती महल बनाने को ,
अब ईद -त्यॊहार की बातें ।
तेरे कहे से दीप बन गये हम ,
अब ना कर अन्धकार की बातें ।














Shrddha said
wah Hemjyo aapki ye gazal seedhe dil main utar gayi
जल गई रस्सी बल बाकी है ,
वो करते हैं मेरे सुधार की बातें ।
मैं रहूँ ना मेरा निशान रहेगा ,
होगी मगर मेरी मज़ार की बातें ।
bahut khoob
http://bheegigazal.blogspot.com
mehek said
कहाँ मुझसे दोस्ती , कहाँ मुझसे दोस्ती ,
कहाँ खुदा से प्यार की बातें ।
मुस्काते गुलाब ,महकती सांसें ,
इन पर बहार की बातें ।
ज़बां पे तला जो वो रु-ब-रू ,
फ़िर काहे तकरार की बातें ।
बच के निकले हैं जान पर बन आई ,
तॊबा तॊबा अब ना मझधार की बातें
wah wah kya gazab bahut badhiya
Advocate Rashmi saurana said
bhut sundar gajal. jari rhe.
विकास said
“उजाड़ दी बस्ती महल बनाने को ,
अब ईद -त्यॊहार की बातें ।”
गजब का लिखती हैं आप.
Annapurna said
वाह ! क्या इश्क का बुख़ार है !!
Shubhashish Pandey said
ye bahut he zabardast rachna hai
bahut he kabil-e-tarif
bahut sunder
सागर नाहर said
पूरी रचान ही सुन्दर है पर ये दो शेर बहुत अच्छे लगे..
तेरे कहे से दीप बन गये हम ,
अब ना कर अन्धकार की बातें ।
रग-रग में लगा इश्क का रोग ,
हकीम करता रहा बुखार की बातें ।
समीर लाल said
उजाड़ दी बस्ती महल बनाने को ,
अब ईद -त्यॊहार की बातें ।
तेरे कहे से दीप बन गये हम ,
अब ना कर अन्धकार की बातें ।
-बहुत खूब!! वाह!
Prem Piyush said
सही है – सबने अच्छा कहा – हम भी कहे देते हैं ।
Harish said
simply ultimate!!!
keep going..
ROHIT said
hema
sunder kavita hai, tumhari best kavita me se ek..har wordl ssahi fit hai. very good and sweet kavita with soild heart…tyi like this s type of kavita so much
rohit