लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

वही तो महान है – पहली कविता

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on जून 23, 2008

धन है तो मन है ,
ज्ञान है तो सम्मान है ,
चरित्र है तो इन्सान है ,
नहीं है असत्य तो ड़र भी नहीं है ।
जिसमें है ये सभी , वही तो महान है, वही तो महान है ।

अहिंसा बिन मानव नहीं ,
प्यार बिन मानव नहीं ,
आत्मा बिन मानव नहीं ,
वह तो पशु समान है ,
जिसमें है ये सभी , वही तो महान है, वही तो महान है ।

—————————————————————————————-

यह कविता मेरी पहली कविता है , जो मैंने कक्षा 11 (1999) में लिखी थी ।
इस कविता को मैंने एक व्यक्ति विशेष पर , उनके व्यवहार पर लिखी थी |
जब मैंने इसे अपनी English Teacher को सुनाया था तब उन्होने इसमें एक परिवर्तन करवाया था ।
मैंने इसमें महान शब्द के स्थान पर भगवान शब्द लिखा जिसे मेरी Fav English Teacher ने यक कह कर हटवाया के भगवान की ये परिभाषा नहीं हैं ।
और तब से मैंने शब्दो का सही प्रयोग करना सीखा ।
हिन्द-युग्म के काव्य-पल्लवन के विषय ” पहली कविता ” में प्रकाशित हुई थी ।

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11 Responses to “वही तो महान है – पहली कविता”

  1. aap ki phali kavita itani sundar hai to ab ki kavita ka to javab hi nhi hoga.bhut sundar rachana.likhati rhe.

  2. neeraj1950 said

    ज्योत्स्ना जी
    हैरान हूँ की आप कक्षा ११ में भी इतनी अच्छी कविता कैसे कर लेती थीं? इतने अच्छे विचार और भाषा लगातार प्रयास करने पर भी नहीं आते. बहुत बढ़िया लिखी थी आप ने ये कविता. इसी से लगता है “होनहार बिरवान के होत चीकने पात”
    नीरज

  3. पहली कविता से अनमोल कुछ नहीं होता…

    ***राजीव रंजन प्रसाद

  4. mehek said

    अहिंसा बिन मानव नहीं ,
    प्यार बिन मानव नहीं ,
    आत्मा बिन मानव नहीं ,
    वह तो पशु समान है ,
    जिसमें है ये सभी , वही तो महान है, वही तो महान है ।

    bahut sahi,aatma aur pyar do jaruri hai insaan banne ke liye,bahut khub

  5. sameerlal said

    याने आप बहुत पहले से ही अच्छा लिखती हैं, वाह. बधाई.

  6. इतनी छोटी आयु में एक गूढ़ विषय को लेकर इतनी सुंदर कविता लिखना – एक भावी महान कवयित्री का सूचक है जिसका प्रमाण आपकी रचनाओं में
    स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
    शुभकामनाएं सहित
    महावीर शर्मा
    (मेरा आप्रेशन कुछ समय के लिए टल गया है। अब आप की जो रचनाएं पढ़ने में
    छुट गई थीं, आराम से पढ़ने का आनंद ले रहा हूं।)

  7. Annapurna said

    अच्छी है पहली कविता ! लगता है सोच-सोच कर दिमाग़ से लिखी गई वैसे आपकी आजकल की कविताएँ सीधे दिल से निकलती है।

  8. बहूत खूब

  9. ROHIT said

    Hi Hem,
    Pahle Kavita Hamesha Dil ke pass hoti hai, word chye kaise bhi kiyon na ho…Tumhri teacher ne sahi kaha tha us waqt…insaan ki paribhasha yehi hoti hai…kavita ki suru ki line hames dil ke kareeb hoti hai,,,,kabhi kabhi kuch din baad kavita dubaara padne ke baad kuch naye shab yaad aati hai…kher pahle kavita dikhai dhanyad….
    sory for late coming again on ur blog..actuly father was not well…now ok
    rohit
    rohit@soon.com

  10. एक उत्तम रचना – सरल और गंभीर भी .

  11. एक उत्तम रचना बहूत खूब आप महान है

    Pankaj

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