मुस्कान पहन कर देख ज़रा
Posted by Hem Jyotsana "Deep" on जून 18, 2008
अश्कों के वस्त्रों को त्याग ,
मुस्कान पहन कर देख ज़रा।
दर्द के सायों में ,
कांटों के हारों में ,
धुमिल जस्बातों में ,
यादों की सौगातों में ,
अश्कों के वस्त्रों को त्याग ,
मुस्कान पहन कर देख ज़रा।
ज़ख्मी हालातों में ,
तन्हाई के सवालातों में ,
रुखसत की उन रातों में ,
ख्वाबों के बिखरे टुकडों में ,
अश्कों के वस्त्रों को त्याग ,
मुस्कान पहन कर देख ज़रा।
टुटे कस्में-वादों में ,
गर्दिश के नजारों में ,
पतझड़ की सी बहारों में ,
टुटे हुऎ सहारों में ,
अश्कों के वस्त्रों को त्याग ,
मुस्कान पहन कर देख ज़रा।














mehhek said
ज़ख्मी हालातों में ,
तन्हाई के सवालातों में ,
रुखसत की उन रातों में ,
ख्वाबों के बिखरे टुकडों में ,
अश्कों के वस्त्रों को त्याग ,
मुस्कान पहन कर देख ज़रा।
hem ji bahut bahut khubsurat,zindagi ke har dukh dariya mein ashq to beh jate hai,unhe kuch pal baad tyag kar muskan ka pehnava chadha lena chahiye,ek sundar sa sandesa deti sundar si kavita ke liye badhai,bahut hi aashavadi hai.
Annapurna said
बहुत बढिया !
महावीर said
ज़िंदगी का पॉज़िटिव नज़रिया दिया है जिसकी आज के युग में
बहुत ही ज़रूरत है। वाह! स्वयं ही मुंह से निकलता है। बहुत सुंदर।
siddharth said
कठिन परिस्थिति में धैर्य, साहस, व आशावाद हमें प्रकाश की ओर ले जाता है। यह सब हम मुस्कराते हुए जी लें यही इस कविता का संदेश है। उत्तम!
Rashmi Saurana said
bhut hi sundar rachana.badhai ho.
अशोक पाण्डेय said
सुंदर व सकारात्मक भावों वाली कविता, धन्यवाद।
Gaurav Sangtani said
bahut acche…. carry on
समीर लाल said
बहुत बढ़िया और पॉजिटिव रचना. बधाई.
Prem Piyush said
समाईली डालना आसान है पर बहुत मुश्किल है मुस्कान पहनना, जब अंदर दुख का दरिया हो ।
फिर भी कोशिश करूँगा जब एसी कविता पढी हो तो…
Shubhashish Pandey said
kya baat hai, bahut khub