लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

अनूभूति में अब हम भी

Posted by Hem Jyotsana "Deep" on अप्रैल 23, 2008

नमस्कार ,

इन दिनो लिखना बहुत कम होगया है ।

आज भी कोई कविता या रचना पोस्ट नहीं कर रही ।

आज सिर्फ़ ये समाचार आप तक पहुचाने आई हुँ कि अनुभूति के पिछ्ले अंक ( 14 april ) से मुझे भी अनुभूति में शामिल किया गया हैं ।

हेम ज्योत्स्ना पाराशर

सादर

हेम ज्योत्स्ना पाराशर “दीप”

About these ads

2 Responses to “अनूभूति में अब हम भी”

  1. अनुभूति में आपका नाम और रचनाएं – ‘उड़ती तितली की तरह’, उड़ना हवा में
    खुल कर’, ‘कविता हूं मैं’,'बहुत काम आया हमें’, बुढ़ापा’, बेड़ियां बाकी अभी हैं’,
    और ‘हे जीव जगत के’ पढ़ कर बहुत अच्छा लगा। अब ब्लॉग पर दुबारा पढ़ने
    में और भी आनंद आ रहा है।

  2. ब्लॉग में ‘बहुत काम आया’ कविता नहीं मिली। इसलिए यहाँ पर ही अपने
    विचार लिख रहा हूं।
    ‘बहुत काम आया हमें’- मतला (पहला शेर) ही कमाल का है, स्वतः ही आगे
    पढ़ने की उत्सुकता रहती हैः-
    जो ग़म देके तुमने सिखाया हमें।
    ज़िन्दगी में बहुत काम आया हमें।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

%d bloggers like this: