हेम की ज्योत्स्ना
Posted by hemjyotsana "Deep" on April 4, 2008
एक हार ने हरा दिया मुझको ,
जीत है क्या ? एहसास करा दिया मुझको ,
ये दुनिया भीड़ का एक सैलाब सा है ,
जब भी सुना गमो का एक शोर सा है ।
तेरे इन्तजार ने, तन्हाई से मिला दिया मुझको ,
तेरी चुपी हर शोर में सुनाई देती थी ,
आँखों को बन्द कर जब भी देखा ,
तू हर रंग में नजर आया ,
तेरी बातों पर जब भी चला मैं ,
मंज़िल तक रास्ता नजर आया ,
तू मेरे साथ हैं इस हौसले ने ,
तुफाँ में साहिल तक आना सीखा दिया मुझको ।
युँही भटक रहे थे हम वक्त के गलियारों में
ढूँढते रहे तुझे रात के सितारों में
पर सुबह को वो सब खो जाते हैं
हम एक बार फ़िर तन्हा हो जाते है
तू मिलेगा एक दिन चांद की तरह
इस सच ने रातभर तारों की तरह चमकना सीखा दिया मुझको
हर रात के अन्धेरे को चीर कर सुबह होती है
वक्त कितना भी बेरहम हो
एक दिन तो जीत होती हैं
समय के साथ “हेम ” की “ज्योत्स्ना ” फ़िर निखरेगी
मुझे यकीन है एक दिन किस्मत बदलेगी
इस लिये हार भी गये तो कोई गम नहीं
तुझसे हारे है ये जीत भी कम नहीं
समय और विश्वास के इस खेल में
बार बार हार कर बार बार जीतना सीखा दिया मुझको ।
जीत है क्या ? एहसास करा दिया मुझको ,
ये दुनिया भीड़ का एक सैलाब सा है ,
जब भी सुना गमो का एक शोर सा है ।
तेरे इन्तजार ने, तन्हाई से मिला दिया मुझको ,
तेरी चुपी हर शोर में सुनाई देती थी ,
आँखों को बन्द कर जब भी देखा ,
तू हर रंग में नजर आया ,
तेरी बातों पर जब भी चला मैं ,
मंज़िल तक रास्ता नजर आया ,
तू मेरे साथ हैं इस हौसले ने ,
तुफाँ में साहिल तक आना सीखा दिया मुझको ।
युँही भटक रहे थे हम वक्त के गलियारों में
ढूँढते रहे तुझे रात के सितारों में
पर सुबह को वो सब खो जाते हैं
हम एक बार फ़िर तन्हा हो जाते है
तू मिलेगा एक दिन चांद की तरह
इस सच ने रातभर तारों की तरह चमकना सीखा दिया मुझको
हर रात के अन्धेरे को चीर कर सुबह होती है
वक्त कितना भी बेरहम हो
एक दिन तो जीत होती हैं
समय के साथ “हेम ” की “ज्योत्स्ना ” फ़िर निखरेगी
मुझे यकीन है एक दिन किस्मत बदलेगी
इस लिये हार भी गये तो कोई गम नहीं
तुझसे हारे है ये जीत भी कम नहीं
समय और विश्वास के इस खेल में
बार बार हार कर बार बार जीतना सीखा दिया मुझको ।
हेम = सोना , Gold
ज्योत्स्ना = किरनें , Rays , light






April 4, 2008 at 10:35 am
kafi sajiv si kavita hai ye, ek khas najariye ko darshati hui , bahut khub
April 4, 2008 at 10:55 am
अच्छी पक्तियाँ है:
समय के साथ “हेम ” की “ज्योत्स्ना ” फ़िर निखरेगी
मुझे यकीन है एक दिन किस्मत बदलेगी
सुंदर !
April 4, 2008 at 11:35 am
सोने के घटते बढते भावों पर लिखा है क्या ?
April 4, 2008 at 1:05 pm
Annapurna jee
nahi ye gold par nhi hemjyotsana par likhi hai
ek aam insaan par… Jo jindagi jeeta hai ladta hai haarta hai fir ladta hai.
April 4, 2008 at 2:36 pm
सुंदर !
April 5, 2008 at 3:27 pm
ढूँढते रहे तुझे रात के सितारों में
पर सुबह को वो सब खो जाते हैं
हम एक बार फ़िर तन्हा हो जाते है
bahut khub hem ji
April 11, 2008 at 12:09 pm
aap hamesha chamakte rahe………
bahut khub
April 14, 2008 at 5:52 pm
हर रात के अन्धेरे को चीर कर सुबह होती है
वक्त कितना भी बेरहम हो
एक दिन तो जीत होती हैं
बहुत सुंदर पंकितया है
April 16, 2008 at 12:02 pm
Didi Aap Jo Bhi Likhte Ho Bahut Achchha Likhte Ho.
April 16, 2008 at 9:22 pm
बहुत खूब हेम.. बहुत सुंदर कविता।
April 17, 2008 at 8:42 pm
bilkul mohtarma……ek din jeet tay hai.
April 18, 2008 at 9:39 am
बहुत बहुत शुक्रिया हेम…..अचानक सर्च करते करते आपके पेज तक पहुन्च गाया……फिर मुझे हिन्दी की साइट्स देख्अने को प्रोतसाहन मिला…..और अब हिन्दी लिख्नने के टूल्स भी ढुन्ढ् लिये…..
April 19, 2008 at 9:54 am
ndi ki itni
ACHCHI Websight
lambe arse baad dekhi
banane wale ko “SAADHUWAAD”
KAVITAEYEN bhi sarahneeye hain
“haar aur jeet sirf antarman ki choti si bhavana hi to nahin!”
shubhkamna
vinay
Lucknow