मिठी बोली हो गई
Posted by hemjyotsana "Deep" on March 20, 2008
रंगो ने की रंगो से बातें होली हो गई ।
मस्ती में मस्तो का मिलना टोली हो गई ।
देखा चुराया माखन ,खूब लगाई ड़ांट ,पर
देख के भोले मोहन को वो ,भोली हो गई ।
मन रंगा जब से श्याम रंग में ,
हर एक खुशी मेरी अब ,हमजोली हो गई ।
हर रात को बंसी सुन सुन कर ,
नीम चढ़े मेरे मन की , मिठी बोली हो गई ।
जब दिल ने आवाज़ लगाई कान्हा कान्हा कान्हा ।
सुख सपनो से भारी , मेरी झोली हो गई ।
मुस्का के जब जब देखा मैंने उसको ,
बीच खड़ी सब दिवारें पल में ,पोली हो गई ।
पूजा दिल में दिल से जब जब उस मुरत को ,
सांसे धड़कन मेरी ,चन्दन रोली हो गई ।






March 20, 2008 at 9:52 pm
hiiiiiii Hem…….
Happy HOLI !!!!!!
holi ke rango main rangi bhut hi achchi kavita hai….
March 21, 2008 at 1:34 pm
आपको होली की कोटिश: बधाईयाँ !
March 21, 2008 at 6:00 pm
Happy HOLI…
March 21, 2008 at 9:16 pm
देखा चुराया माखन ,खूब लगाई ड़ांट ,पर
देख के भोले मोहन को वो ,भोली हो गई ।
मन रंगा जब से श्याम रंग में ,
हर एक खुशी मेरी अब ,हमजोली हो गई ।
bahut hi sundar,kanha to natkhat hai,bhola bhi,holi ki bahut bahut badhai.
March 23, 2008 at 8:19 pm
ज्योत्सनाजी,दुनिया कितनी छोटी है, आप कोटा की निकलीं.मैं भी कोटा की ही हूं, किन्तु विवाह पश्चात पतिदेव के साथ इधर उधर भटकते, अब देश की राजधानी में डेरा है.मुद्दे पर आती हूं, इतनी सुन्दर रचनाओं के लिये बधाई स्वीकार करें. य़दि हो सके तो अपना ई-मेल एड्रेस जरूर दें. होली की बधाई आपको.