लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for March 10th, 2008

कुछ ना मिला

Posted by hemjyotsana "Deep" on March 10, 2008

इतने बडे अम्बर को हमने छू कर देखा कुछ ना मिला ,
दर्द भरे इस दिल में हमको गम के सिवा कुछ ना मिला ,
रोशनी भी चांद के हैं पास कहाँ ,वो तो मांगे सूरज से ,
सूरज बोला मेरे हाथ  भी , राख के सिवा कुछ ना मिला ।
कहते हैं जीवन को खेल धूप-छांव का ,
ऎसे भी इन्सान मिलें है , जिन्हे छाव भरा एक पल ना मिला ।

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