इतने बडे अम्बर को हमने छू कर देखा कुछ ना मिला ,
दर्द भरे इस दिल में हमको गम के सिवा कुछ ना मिला ,
रोशनी भी चांद के हैं पास कहाँ ,वो तो मांगे सूरज से ,
सूरज बोला मेरे हाथ भी , राख के सिवा कुछ ना मिला ।
कहते हैं जीवन को खेल धूप-छांव का ,
ऎसे भी इन्सान मिलें है , जिन्हे छाव भरा एक पल ना मिला ।













