लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

हंसीन था ये सपना

Posted by hemjyotsana "Deep" on March 7, 2008

मेरे आशियाने में  , तेरी कसम तेरी ही कमी थी ।
थे चांद तारे , खुदा और तेरी तस्वीरें लगी थी ।
बहुत कम थे गम , वहाँ तो बस खुशीयाँ ही पल रही थी ।
अन्धियारे की दावत हुई , उजालों की महफ़िल सजी थी ।
जो आँखे खुली तो था बन्द कमरा ,
अन्धेरे में  बिस्तर पर मैं लेटी हुई थी ।
हसीन था ये सपना इतना कि जाग कर  ,
 रात भर ,  तेरी याद में मैं रोती रही थी ।

5 Responses to “हंसीन था ये सपना”

  1. hem jee,
    cahliye achha hai sapna dekhtee rahein aur hamein bhee dihaatee rahein.

  2. deep jagdeep said

    आपने अभी तक मेरे ब्लाग के बारे में कोई राय नहीं दी, आशा है जल्द ही कोई परामर्श मिलेगा
    दीप जी बहुत अच्ठा ख्याल है। बेहतरीन यादें संजोई हैं। मेरे सवालों के जवाब भी दे रही हैं धीरे धीरे। थोड़ी गल्ती सुधार कर दूं कि हसीन और आशियाने के उपर बिंदी नहीं आएगी और सजी के पैर में भी नहीं आएगी।

  3. mehhekk said

    बहुत कम थे गम , वहाँ तो बस खुशीयाँ ही पल रही थी ।
    अन्धियारे की दावत हुई , उजालों की महफ़िल सज़ी थी ।
    हंसीन था ये सपना इतना कि जाग कर ,
    कमरे में , घंटों तक तेरी याद में रोती रही थी ।
    bahut khub hem ji,andheron ki dawat,ujalon ki mehfil,bahut achha laga.

  4. बहुत बहुत शुक्रिया दीप जगदीप जी

  5. Tosha said

    Bahut hi accha likha hia aap ne … !!:)

    Mere aashiyane main …….
    ……. Khuda aur teri tasveer thi !!

    Bahut khoob!

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