लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for March 7th, 2008

हंसीन था ये सपना

Posted by hemjyotsana "Deep" on March 7, 2008

मेरे आशियाने में  , तेरी कसम तेरी ही कमी थी ।
थे चांद तारे , खुदा और तेरी तस्वीरें लगी थी ।
बहुत कम थे गम , वहाँ तो बस खुशीयाँ ही पल रही थी ।
अन्धियारे की दावत हुई , उजालों की महफ़िल सजी थी ।
जो आँखे खुली तो था बन्द कमरा ,
अन्धेरे में  बिस्तर पर मैं लेटी हुई थी ।
हसीन था ये सपना इतना कि जाग कर  ,
 रात भर ,  तेरी याद में मैं रोती रही थी ।

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