मेरे आशियाने में , तेरी कसम तेरी ही कमी थी ।
थे चांद तारे , खुदा और तेरी तस्वीरें लगी थी ।
बहुत कम थे गम , वहाँ तो बस खुशीयाँ ही पल रही थी ।
अन्धियारे की दावत हुई , उजालों की महफ़िल सजी थी ।
जो आँखे खुली तो था बन्द कमरा ,
अन्धेरे में बिस्तर पर मैं लेटी हुई थी ।
हसीन था ये सपना इतना कि जाग कर ,
रात भर , तेरी याद में मैं रोती रही थी ।













