Archive for March, 2008
Posted by hemjyotsana "Deep" on March 28, 2008
28-march,
kya aaj kuch khaas hain?
Kuch to hoga warna 28 march shuru hote hi hame itne phone nahin aate. Ek ke baad ek . Ek se baat kar hi rahe the ke dusara waiting mein. Pataa nahin kaise aaj sab hamari yaad aa rahi hai. Kai saathi to ese bhi hai jo mahino yaad nahin karte par aaj…!
Orkut par bhi msg par msg mil rahe to sochaa blog par bhi dekhe wahaa bhi kya aaj hame yaad kiya jaa rahaa hai… Aap logo ko kaise pataa chale ke aaj kya hai… Hamane sochaa hami batade ke aaj kuch khaas nahin hain 
hamara janam din hai
bas.
Aaj hindi mein nahin sakti kyo ye post apne nokia N72 phone se kar rahi hun
hamare laptop mein haal filhaal internet nahin.
Kal se ab tak soch rahi hun post karu ya naa karu…. Par ab kar hi deti hu. aap sab ka aashirvaad jo chaahiye.
Hem jyotsana
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Posted by hemjyotsana "Deep" on March 20, 2008
रंगो ने की रंगो से बातें होली हो गई ।
मस्ती में मस्तो का मिलना टोली हो गई ।
देखा चुराया माखन ,खूब लगाई ड़ांट ,पर
देख के भोले मोहन को वो ,भोली हो गई ।
मन रंगा जब से श्याम रंग में ,
हर एक खुशी मेरी अब ,हमजोली हो गई ।
हर रात को बंसी सुन सुन कर ,
नीम चढ़े मेरे मन की , मिठी बोली हो गई ।
जब दिल ने आवाज़ लगाई कान्हा कान्हा कान्हा ।
सुख सपनो से भारी , मेरी झोली हो गई ।
मुस्का के जब जब देखा मैंने उसको ,
बीच खड़ी सब दिवारें पल में ,पोली हो गई ।
पूजा दिल में दिल से जब जब उस मुरत को ,
सांसे धड़कन मेरी ,चन्दन रोली हो गई ।
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Posted by hemjyotsana "Deep" on March 11, 2008
लोकतन्त्र का अन्तिम क्षण हैं कह कर आप हंसे ,
सब के सब हैं भ्रष्टाचारी ,कह कर आप हंसे ,
कितने आप सुरक्षित हैं जब में लगी सोचने ,
सहसा मुझे अकेला पाकर , फ़िर से आप हंसे ।
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Posted by hemjyotsana "Deep" on March 10, 2008
इतने बडे अम्बर को हमने छू कर देखा कुछ ना मिला ,
दर्द भरे इस दिल में हमको गम के सिवा कुछ ना मिला ,
रोशनी भी चांद के हैं पास कहाँ ,वो तो मांगे सूरज से ,
सूरज बोला मेरे हाथ भी , राख के सिवा कुछ ना मिला ।
कहते हैं जीवन को खेल धूप-छांव का ,
ऎसे भी इन्सान मिलें है , जिन्हे छाव भरा एक पल ना मिला ।
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Posted by hemjyotsana "Deep" on March 7, 2008
मेरे आशियाने में , तेरी कसम तेरी ही कमी थी ।
थे चांद तारे , खुदा और तेरी तस्वीरें लगी थी ।
बहुत कम थे गम , वहाँ तो बस खुशीयाँ ही पल रही थी ।
अन्धियारे की दावत हुई , उजालों की महफ़िल सजी थी ।
जो आँखे खुली तो था बन्द कमरा ,
अन्धेरे में बिस्तर पर मैं लेटी हुई थी ।
हसीन था ये सपना इतना कि जाग कर ,
रात भर , तेरी याद में मैं रोती रही थी ।
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Posted by hemjyotsana "Deep" on March 4, 2008
उदास रात की कोई सुबह हसीन नहीं ।
नहीं आँसमां मेरा ,मॆरी कहीं ज़मीन नहीं ।
मैं खूशबू बन के हवा में नहीं बसती ,
मैं कोई किरणों की तरह भी महीन नहीं ।
मुझे ख्वाबों में मत तराश अभी ,
उडती तितली की तरह, मैं कोई रंगीन नहीं ।
छुप जाते हैं कभी-कभी , चाँद-तारे भी,
मेरा कत्ल ही हैं , ये गुनाह कोई संगीन नही ।
दफ़न कर या जला दे अब मुझको ,
ज़िस्म में रूह नहीं ,अब कोई तौहीन नहीं ।
भूला बैठा है , वो वेवफ़ा मुझको ,
मिला कहीं तो पह्चाने, इसका भी यकीन नहीं ।
बुझ गया ये “दीप” ,सुबह के सितारे के लिये ,
खुश हूँ मिट कर भी , मैं कोई गमगीन नहीं ।
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Posted by hemjyotsana "Deep" on March 2, 2008
आज से एक साल पहले मैंने २ comments करी थी २ ब्लोगस पर , हिन्दी कैसे लिखूँ ब्लोग पर ?
मेरे ब्लोग http://hemjyo.wordpress.com पर मुझे सबसे पहले जो प्रतिक्रिया मिली वो एक जवाब था somen का (जिन से मैंने पुछा था ) । उन्होने मुझे एक लिंक दिया और बताया के वहाँ में हिन्दी लिखूँ सकती हूँ और फ़िर उसे copy-paste करलूँ । बस फ़िर क्या था मैंने हिन्दी में ब्लोग लिखना शुरु किया और आज लम्हे ज़िन्दगी के ने एक साल पूरा किया ।
और लम्हे जिन्दगी के पर जो पहली प्रतिक्रिया आई वो वहाँ से जहाँ मैंने पुछा था हिन्दी लिखने के लिये ।मेरे दोनो ब्लोग पर जो पहली रचनाये थी वो उन दो comment का जवाब थी और उसके बाद से मेरे मन में ये बात घर कर गई के ब्लोगर…. बहुत अच्छे और सभ्य होते हैं जो किसी अन्जान की मदद बिना सोचे करते हैं ।
वो यहीं कहीं है ।
काश ऐसा होता…..
ये मेरी उन दो comment के लिंक हैं जो मैने सबसे पहले की
और ये उनके जिन पर उन दो के जवाब आये ।
आज से ठीक एक साल पहले 2 मार्च को लम्हे ज़िन्दगी पर पहली पोस्ट प्रकाशित हुई थी ।
http://hemjyotsana.wordpress.com/2007/03/02/kalpnaaye-saari/
मार्च मैं कुल 4 रचनायें प्रकाशित हुई ।
अप्रैल और जुन में कुछ पोस्ट नही किया मई में 6 पोस्ट प्रकाशित की ।और फ़िर जुलाई से हर माह पोस्ट करती रही ।
और कोशिश करुगी के आगे भी अच्छा लिखती रहूँ ।
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इस एक साल में बहुत कुछ सीखा है । यहाँ कई , सिखाने वाले गुणी-जन मिले , जिनसे बहुत कुछ सिखा है आगे और सीखना है ।
शुक्रिया आप सब भी का जिन्होने मुझे पढा सराहा सुधारा ।
सादर
हेम ज्योत्स्ना पाराशर “दीप”
लम्हे जिन्दगी के
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