लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

जीवन बसंत

Posted by hemjyotsana "Deep" on February 14, 2008

नए रगों से हुई फिर यारी, खिल गई हर फुलवारी,
भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी।

हर ओर खिली हैं उम्मीदें, महकी जीवन बगिया सारी,
कल तक नन्हें पौधे थे, फल देने की है अब तैयारी।
भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी।

मौसम हैं दो सुख-दुख, ज़िंदगी होती इनसे प्यारी,
जीवन वन में, पतझड़ संग, आती हैं बसंत ऋतु प्यारी।
भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी।

ओढ़ के आँचल हरा भरा, फल फूल से भरी धरती न्यारी,
ज्यों डाल के वस्त्र कोमल, आभूषण पहन निकले नारी।
भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी।

खुशियों में खोने वालों, दर्द का ज्ञान ना खोना,
याद रहे जीवन बसंत संग, आती फिर पतझड़ की बारी,
भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी।

दर्द भरे किसी आँगन में, मीठी बच्चे की किलकारी
अंत है होता क्षण भंगुर, पतझड़ पर बसंत, ही भारी।
भूल ले बीते पतझड़ को , शुरु नये सृजन की तैयारी।

published on http://www.anubhuti-hindi.org/

10 Responses to “जीवन बसंत”

  1. सुनीता शानू Says:

    मौसम हैं दो सुख-दुख, ज़िंदगी होती इनसे प्यारी,
    जीवन वन में, पतझड़ संग, आती हैं बसंत ऋतु प्यारी।
    भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी।

    बहुत खूबसूरत है…

  2. mehhekk Says:

    bahut khubsurat varnan hai jeevan basant ka hemji,
    ओढ़ के आँचल हरा भरा, फल फूल से भरी धरती न्यारी,
    ज्यों डाल के वस्त्र कोमल, आभूषण पहन निकले नारी।
    beautiful lines

    sahi kaha sukh dukh do mausam hai,aate jate hai,magar jeevan patjhad par basant hi bhari hai,
    sundar prastuti
    anubhuti mein prakashit huyi,bahut badhai.

  3. samredra sharma Says:

    apka andaz pasand aaya keep writing

  4. समीर लाल Says:

    बहुत खूब!! अच्छा लगा पढ़कर.

  5. reetesh gupta Says:

    अच्छी लगी आपकी कविता …बधाई

  6. विनय प्रजापति Says:

    यह लीजिए, महक की तरह मैंने भी पकड़ा चिट्ठा चोर:

    http://vinayprajapati.wordpress.com/merii-bhii-post-chorii-hui/

  7. विनय प्रजापति Says:

    अब तो मैं सोच रहा हूँ कि चिट्ठा चोरी पर एक वेब साइट लॉन्च करें जिसमें पाँच लोग भागीदार हों और जिसे जो चिट्ठा मिले उस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित करे| इस काम में बड़ा मज़ा आयेगा क्यों तैयार है आप लोग| या मैं यह विचार त्याग दूँ|

  8. विनय प्रजापति Says:

    क्या नाम रखा जाये अपने इस नये वेबलॉग का कुछ सोच के बताये ना|

  9. विनय प्रजापति Says:

    वह मारा पापड़ वाले को, अगर आप साथ दें तो क्या नहीं हो सकता है! आपको सभी को यह जानकर बेहद ख़ुशी होगी कि जिसने मेरा चिट्ठा चुराया था, वर्डप्रेस ने उसका अकाउंट प्रकानाधिकार नियमों के अंर्तगत बंद कर दिया है| आप सभी का तहे-दिल से धन्यवाद कि आपने साथ देकर चिट्ठा चोरों को मारने में मदद की| अब समय आ गया है कि चिट्ठा चोरों पर लगाम कसी जाये तो क्यों न एक वेबलॉग लॉच करें जो ब्लॉग लेखकों को न्याय दिला सके| नीचे बलॉग का नाम दिया जा रहा है, कृपया एक का चुनाव करें:

    १. वह मारा पापड़ वाले को
    २. साथी हाथ बँटाना रे
    ३. चोरों की ख़बर
    ४. कॉट रेड हेंडेड
    ५. असली नक़ली
    ६. हम एक जुट

  10. rubisharma Says:

    Aap Bahut Accha or Bahut hi Khas Likh ti Hai. God Sabhi ko Kuch Na Kuch deta hai, to Aap ye maan lijiye ki Ye God ne aapko ek Gift diya hai, Ki aap likeh or Accha Likhe.

    Thanks

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