लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

मेरी प्रथम वेबसाइट

Posted by hemjyotsana "Deep" on February 11, 2008

maa-sarsawati.jpg

नमस्कार ,

आज के इस शुभ दिन मैं अपनी बेबसाइट सुनहरी किरने - Golden Rays शुरु कर रही हूँ ।

आप सभी का लम्हे जिन्दगी के को जिस तरह प्यार और प्रोत्साहन मिला है आशा करती हूँ यहाँ भी आप सब का आशीर्वाद मिलता रहेगा ।

और एक खबर आज ही मेरी एक रचना जीवन बसन्त  एक साप्ताहिक ई-पत्रिका अनुभूति में प्रकाशित हुई हैं ।

सादर

हेम ज्योत्स्ना “दीप”

http://hemjyotsana.com

http://hemjyotsana.wordpress.com

golden-ray.jpg

lamhe-jindagi-ke.jpg

14 Responses to “मेरी प्रथम वेबसाइट”

  1. sanjay Says:

    देखी…. अच्‍छी है. अब कुछ अच्‍छा सा लिख भी दीजिए.

  2. krishan lal krishan Says:

    आप के इस नये ब्लाग सीइट आरम्भ करने पर मेरी शुभ कामनायें ।
    कविता लिखना कोई मुश्किल नहीं।

    रात भर हम सो ना पाये
    हर पल ही बदली करवटें
    जब सुबह बिस्तर से उठे
    एक और कविता हो गयी

    दिन मे तो जीते रहे हम
    औरो सी आम जिन्दगी
    सांझ जब ढलने को आयी
    एक और कविता हो गयी

    किसी याद में खोने से पहले
    जब रात को सोने से पहले
    ‘दीप’ हमने सब बुझाये
    एक और कविता हो गयी

    दिन हुआ, औरो की तरह
    हम जब पहुंचे काम पर
    हर शै मे वो ही दी दिखाई
    एक और कविता हो गयी

    रही वो मेरे पहलु में बैठी
    मुझको खबर भी ना हुई
    उठ के जब जाने को आयी
    एक और कविता हो गयी

    बेअहतर है ना तारीफ कर
    दुनियां ने जब भी ‘कृष्ण’ की
    कविता कोई अच्छी बतायी
    एक और कविता हो गयी

    इसलिये कहता हूँ लिखिये, खूब लिखिये। हेम जी आप के इस ब्लाग पर पहली बार आया हू। आप के पर्यास को सरहाने फिर भी

  3. मैथिली Says:

    बधाई हो

  4. krishan lal krishan Says:

    रात भर हम सो ना पाये
    हर पल ही बदली करवटें
    जब सुबह बिस्तर से उठे
    एक और कविता हो गयी

    दिन मे तो जीते रहे हम
    औरो सी आम जिन्दगी
    सांझ जब ढलने को आयी
    एक और कविता हो गयी

    किसी याद में खोने से पहले
    जब रात को सोने से पहले
    ‘दीप’ हमने सब बुझाये
    एक और कविता हो गयी

    दिन हुआ, औरो की तरह
    हम जब पहुंचे काम पर
    हर शै मे वो ही दी दिखाई
    एक और कविता हो गयी

    रही वो मेरे पहलु में बैठी
    मुझको खबर भी ना हुई
    उठ के जब जाने को आयी
    एक और कविता हो गयी

    बेहतर है ना तारीफ कर
    दुनियां ने जब भी ‘कृष्ण’ की
    कविता कोई अच्छी बतायी
    एक और कविता हो गयी

    देखिये बैठे बिठाये एक कविता जैसा कुछ बन गया है और आप जैसा कवि हृदय जब कुछ लिखेगा तो कविता खुद बखुद बन जायेगी इसलिये कहता हूँ लिखिये, खूब लिखिये। हेम जी आप के इस ब्लाग पर पहली बार आया हू। आप के प्रयास को सरहाने फिर भी आ पाया तो मुझे अच्छा ही लगेगा।
    पुन: शुभकामनायें

    किसी वजह से पहले कामेन्टस आधे अधूरे रह गये थे पता नहीं पंहुचे या नहीं इसलिये दोबारा भेज रहा हूं।

  5. Anunad Singh Says:

    सुस्वागतम !

  6. Jitendra Singh Says:

    hi
    Badhai ho new website kholane pr

  7. mehhekk Says:

    bahut khubsurat hai,shubhkamnayon ke saath badhai.

  8. Annapurna Says:

    बधाई !
    वेबसाइट की सफलता के लिए शुभकामनाएं !

    सस्नेह
    अन्नपूर्णा

  9. sajeev Says:

    बहुत बहुत बधाइयाँ

  10. डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल Says:

    बधाई और वेब दुनिया में स्वागत.
    एक अनुरोध. कृपया अपने परिचय को एक बार फिर से देख लें. उसमें वर्तनी की कुछ भूलें हैं.

  11. pryas Says:

    ज्योत्सना जी,
    आपको नई-नवेली सुंदर बेबसाइट “सुनहरी-किरणें” शुरू करने के लिये हार्दिक शुभकामनाँए!

  12. anuradha srivastav Says:

    बधाई और वेब दुनिया में स्वागत

  13. Amit Says:

    बधाई हो इंटरनेट पर अपना मकान लेने पर!! :)

  14. sudarshansingh Says:

    Viyogi hoga pahla kavi aah se nikla hoga gaan . Nikal kar aankho se chhupchhap bahi hogi kavita anjan. bahut sunder bhavon se bhari kavita ki nirjharni ajasra jharnne dijiea.

    saadar
    SUDARSHAN SINGH BILASPUR

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