मेरी प्रथम वेबसाइट
Posted by hemjyotsana "Deep" on February 11, 2008
नमस्कार ,
आज के इस शुभ दिन मैं अपनी बेबसाइट सुनहरी किरने - Golden Rays शुरु कर रही हूँ ।
आप सभी का लम्हे जिन्दगी के को जिस तरह प्यार और प्रोत्साहन मिला है आशा करती हूँ यहाँ भी आप सब का आशीर्वाद मिलता रहेगा ।
और एक खबर आज ही मेरी एक रचना जीवन बसन्त एक साप्ताहिक ई-पत्रिका अनुभूति में प्रकाशित हुई हैं ।
सादर
हेम ज्योत्स्ना “दीप”








February 11, 2008 at 6:50 am
देखी…. अच्छी है. अब कुछ अच्छा सा लिख भी दीजिए.
February 11, 2008 at 7:03 am
आप के इस नये ब्लाग सीइट आरम्भ करने पर मेरी शुभ कामनायें ।
कविता लिखना कोई मुश्किल नहीं।
रात भर हम सो ना पाये
हर पल ही बदली करवटें
जब सुबह बिस्तर से उठे
एक और कविता हो गयी
दिन मे तो जीते रहे हम
औरो सी आम जिन्दगी
सांझ जब ढलने को आयी
एक और कविता हो गयी
किसी याद में खोने से पहले
जब रात को सोने से पहले
‘दीप’ हमने सब बुझाये
एक और कविता हो गयी
दिन हुआ, औरो की तरह
हम जब पहुंचे काम पर
हर शै मे वो ही दी दिखाई
एक और कविता हो गयी
रही वो मेरे पहलु में बैठी
मुझको खबर भी ना हुई
उठ के जब जाने को आयी
एक और कविता हो गयी
बेअहतर है ना तारीफ कर
दुनियां ने जब भी ‘कृष्ण’ की
कविता कोई अच्छी बतायी
एक और कविता हो गयी
इसलिये कहता हूँ लिखिये, खूब लिखिये। हेम जी आप के इस ब्लाग पर पहली बार आया हू। आप के पर्यास को सरहाने फिर भी
February 11, 2008 at 7:10 am
बधाई हो
February 11, 2008 at 7:24 am
रात भर हम सो ना पाये
हर पल ही बदली करवटें
जब सुबह बिस्तर से उठे
एक और कविता हो गयी
दिन मे तो जीते रहे हम
औरो सी आम जिन्दगी
सांझ जब ढलने को आयी
एक और कविता हो गयी
किसी याद में खोने से पहले
जब रात को सोने से पहले
‘दीप’ हमने सब बुझाये
एक और कविता हो गयी
दिन हुआ, औरो की तरह
हम जब पहुंचे काम पर
हर शै मे वो ही दी दिखाई
एक और कविता हो गयी
रही वो मेरे पहलु में बैठी
मुझको खबर भी ना हुई
उठ के जब जाने को आयी
एक और कविता हो गयी
बेहतर है ना तारीफ कर
दुनियां ने जब भी ‘कृष्ण’ की
कविता कोई अच्छी बतायी
एक और कविता हो गयी
देखिये बैठे बिठाये एक कविता जैसा कुछ बन गया है और आप जैसा कवि हृदय जब कुछ लिखेगा तो कविता खुद बखुद बन जायेगी इसलिये कहता हूँ लिखिये, खूब लिखिये। हेम जी आप के इस ब्लाग पर पहली बार आया हू। आप के प्रयास को सरहाने फिर भी आ पाया तो मुझे अच्छा ही लगेगा।
पुन: शुभकामनायें
किसी वजह से पहले कामेन्टस आधे अधूरे रह गये थे पता नहीं पंहुचे या नहीं इसलिये दोबारा भेज रहा हूं।
February 11, 2008 at 9:44 am
सुस्वागतम !
February 11, 2008 at 10:06 am
hi
Badhai ho new website kholane pr
February 11, 2008 at 10:35 am
bahut khubsurat hai,shubhkamnayon ke saath badhai.
February 11, 2008 at 11:38 am
बधाई !
वेबसाइट की सफलता के लिए शुभकामनाएं !
सस्नेह
अन्नपूर्णा
February 11, 2008 at 12:49 pm
बहुत बहुत बधाइयाँ
February 11, 2008 at 2:16 pm
बधाई और वेब दुनिया में स्वागत.
एक अनुरोध. कृपया अपने परिचय को एक बार फिर से देख लें. उसमें वर्तनी की कुछ भूलें हैं.
February 11, 2008 at 4:47 pm
ज्योत्सना जी,
आपको नई-नवेली सुंदर बेबसाइट “सुनहरी-किरणें” शुरू करने के लिये हार्दिक शुभकामनाँए!
February 11, 2008 at 5:25 pm
बधाई और वेब दुनिया में स्वागत
February 11, 2008 at 8:24 pm
बधाई हो इंटरनेट पर अपना मकान लेने पर!!
February 23, 2008 at 9:40 am
Viyogi hoga pahla kavi aah se nikla hoga gaan . Nikal kar aankho se chhupchhap bahi hogi kavita anjan. bahut sunder bhavon se bhari kavita ki nirjharni ajasra jharnne dijiea.
saadar
SUDARSHAN SINGH BILASPUR