के तुम आ गये
Posted by hemjyotsana "Deep" on February 6, 2008
एक गीत
बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये |
कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये |
हे मजिंल कहाँ और राहें ये कैसी ,
यूँ ही बेवजह चले जा रहे थे के तुम आ गये |
कभी तो सुनू हाल-ए-दिल तुझसे तेरा ,
शोर-ए-दुनिया सुने जा रहे थे के तुम आ गये |
मुझे मुस्कुराने की आदत नहीं थी ,
बेसबब हम रोए जा रहे थे के तुम आ गये |
थे टूटे हुए पर , थे टूटे हुए ,
पर , ना बिखर पा रहे थे के तुम आ गये |
थी वीरान दुनिया ख्वाबो की मेरी ,
ख्यालो में भी थे खामोशी के साये ,के तुम आ गये |
जो सर को झुका लूँ ,लगे सामने तुम ,
जो आँखे करू बंद , नज़र आए तुम ,
तुम ही ये बताओ के तुम कौन हो ?
खुद ही से तेरी बातें किए जा रहे के तुम आ गये |






February 6, 2008 at 9:36 pm
samaj ki samasyao par bhi likho
February 6, 2008 at 9:41 pm
कभी तो सुनू हाल-ए-दिल तुझसे तेरा ,
शोर-ए-दुनिया सुने जा रहे थे के तुम आ गये |
मुझे मुस्कुराने की आदत नहीं थी ,
बेसबब हम रोए जा रहे थे के तुम आ गये |
थे टूटे हुए पर , थे टूटे हुए ,
पर , ना बिखर पा रहे थे के तुम आ गये |
bahut bahut khubsurat hemji,tute huye par,na bikhar pa rehe ,ke tum aagaye,very very touching.
tumhi batao tum kaun ho,intazaar uska aur puchna bhi usise,bahut pyari ada hai.
shandar geet hai.
February 7, 2008 at 12:20 pm
थे टूटे हुए पर , थे टूटे हुए ,
पर , ना बिखर पा रहे थे के तुम आ गये |
बहुत सुंदर शब्द और भाव…लिखती रहिएगा.
नीरज
February 8, 2008 at 12:57 am
yuhi internet ki duniya mein ghum rahe the ki
achii kavita padhne ki laalach mein tumhare page pe aag gaye
achii kavita padh ke hamesha hi hridya praffullit ho jaata hai….is prafullit hridya ki taraf se aapka dhanyavaad….
February 8, 2008 at 7:50 pm
Hem apne jajbato ka izhaar badee saralta ke saath kartee hai.
February 10, 2008 at 7:16 am
मजिंल कहाँ और राहें ये कैसी… the way, this sentence goes, is amazing…