के तुम आ गये
Posted by hemjyotsana "Deep" on February 6, 2008
एक गीत
बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये |
कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये |
हे मजिंल कहाँ और राहें ये कैसी ,
यूँ ही बेवजह चले जा रहे थे के तुम आ गये |
कभी तो सुनू हाल-ए-दिल तुझसे तेरा ,
शोर-ए-दुनिया सुने जा रहे थे के तुम आ गये |
मुझे मुस्कुराने की आदत नहीं थी ,
बेसबब हम रोए जा रहे थे के तुम आ गये |
थे टूटे हुए पर , थे टूटे हुए ,
पर , ना बिखर पा रहे थे के तुम आ गये |
थी वीरान दुनिया ख्वाबो की मेरी ,
ख्यालो में भी थे खामोशी के साये ,के तुम आ गये |
जो सर को झुका लूँ ,लगे सामने तुम ,
जो आँखे करू बंद , नज़र आए तुम ,
तुम ही ये बताओ के तुम कौन हो ?
खुद ही से तेरी बातें किए जा रहे के तुम आ गये |
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