किडनी रेक्रेट की खबर सुन सुन कर जहाँ मानवता इंसानियत रो रही है ।
जहाँ एक किसान को आत्महत्या करती पड रही है वो भी उस Bank loan पर जो उसने लिया नहीं…. इस सब के बीच भी कुछ ऎसा होता है जिस पर मानवता सिर उठा कर कहती है कि अभी मैं हूँ । कुछ ऎसे इंसान जो इंसानियत को जिन्दा रखे है ।
ईशान वेदम एक ऎसा नाम हैं जो अब जिन्दा ना होकर भी जिन्दा है ।
श्रीमत्ती स्वाति वेदम और वेदम जी ( हैदराबाद ) को जब पता चला के उनके बेटे को ब्रेन केन्सर (Brain cancer) है उनका बेटा सिर्फ़ 6-8 माह का था । ये सोच कर और सुन कर ही जहाँ मेरी आँखें नम हो जाती है वहाँ उन माँ बाप पर क्या गुजर रही होगी ।
वो जब अपने बच्चे को अपनी खोद में लेते होगें उसे दोडते भागते गिरते देख जब मुस्कुराते होगे तो उस हंसी में खुद खून के आँसू भी रोते होगे ।
जो परिवार अपने जिगर के लिये वो कुछ नहीं कर सकते थे सिर्फ़ एक बेबस इन्तजार के सिवा उस वक्त उन्होने एक ऎसा फ़ैसला लिया कि उस फ़ैसले के बाद उनका ईशान एक जिन्दगी नहीं 3 जिन्दगी जीने लगा । ईशाने की आँखे आज भी इस दुनिया को देख रही हैं ।
ईशान एक नहीं 3 घरो का चिराग बन गया ।
ईशान इस दुनिया सबसे छोटा अगंदान देने वाला बच्चा है ।
जब ईशान की मौत हुई वो सिर्फ 18 महीने का था |
लेकिन उस दुख भरे माहोल में उसके अगंदान करने के अपने फ़ैसले को पुरा किया ।
ईशान की आँखे २बच्चों को लगाई गई है ।
आज ईशान एक नही ३बच्चो की जिन्दगी है ।
आज जब ईशान की माँ सुबह उठती है तो अपने बच्चे का खाली झुला देखती होगी तो नमी भरी आंखो मे एक सूकुन भी होगा एक उनका बेटा 18 महीने की उम्र में भी एक हीरो है जिसने ३घरो मे जिन्दगी दी है ।
सच मे ये खबर जब में NDTV पर सुनी तो आँखे भर आई और स्वाति वेदम जी के सलाम करने को जी किया ।
सलाम जिन्दगी ।













