भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 28, 2007
एक नज़्म
भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे ,
सबके साथ होकर भी जब कोई अकेला दिखाई दे |
हँसते ही जिसके दिखे एक समंदर सा दर्द का ,
देख जिसे लगे इंतज़ार में एक बुत अपने खुदा के ,
जिसकी सोच समझ जैसे खोई सी लगे ,
जिसकी बातों से ख़ुद तेरी तस्वीर बने ,
बस बिना खोए एक भी पल उसे ,
मेरा नाम लेके मिल लेना ,
वो मैं ना भी हुआ तो कोई ग़म नहीं ,
वो मेरे जैसा हो जाएगा ,
मैं ना सही कोई तो तुम्हे मिल जाएगा |
और अगर याद मेरा नाम भी तब ना आए ,
तो बस अपने नाम से पुकार लेना उसे ,
यक़ीन करो वो मैं हुआ तो एक पल में
पहचान लूँगा , तुम्हे फिर तुमसे माँग लूँगा |






December 28, 2007 at 5:39 pm
umdaa nazam..
ajeet
December 29, 2007 at 1:45 am
beautiful
December 29, 2007 at 3:00 pm
Its really a nice kavita
Congrats
December 29, 2007 at 6:36 pm
its very touchy ! take care
December 30, 2007 at 1:54 am
It’s Absolute love
Beautiful !!!
December 31, 2007 at 1:07 am
Ultimate……….
February 13, 2008 at 7:08 pm
jitne comments upar hain , unme bhi bhaut kam shabd hain.
kyu ki iski tarif k liye shbdo ka aakal sa pad gaya hai.
February 13, 2008 at 7:10 pm
bahut sookoon hain isme