लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for December 28th, 2007

भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे

Posted by hemjyotsana "Deep" on December 28, 2007

एक नज़्म 

भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे ,
सबके साथ होकर भी जब कोई अकेला दिखाई दे |
हँसते ही जिसके दिखे एक समंदर सा दर्द का ,
देख जिसे लगे इंतज़ार में एक बुत अपने खुदा के ,
जिसकी सोच समझ जैसे खोई सी लगे ,
जिसकी  बातों से ख़ुद तेरी तस्वीर बने ,
बस बिना खोए एक भी पल उसे ,
मेरा नाम लेके मिल लेना ,
वो मैं ना भी हुआ तो कोई ग़म नहीं ,
वो मेरे जैसा हो जाएगा ,
मैं ना सही कोई तो तुम्हे मिल जाएगा |
और अगर याद मेरा नाम भी तब ना आए ,
तो  बस अपने नाम से पुकार लेना उसे ,
यक़ीन करो वो मैं हुआ तो एक पल में 
पहचान लूँगा , तुम्हे फिर तुमसे माँग लूँगा |

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