इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 26, 2007
सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |
जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
माना के तबाह किया उसने मुझे ,
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |
ज़ख़्म दिल के नासूर ना बन जाए
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |
माना वो ज़िंदगी हैं मेरी लेकिन ,
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|






December 26, 2007 at 8:42 pm
क्या खुब लिखा है “दीप”, गजल काफी पसंद आया ।
इसी तर्ज पर कुछ यूँ अर्ज है –
जिन बातों को कल तक न समझा था,
न जाने क्यों , आज समझना जरुरी है ।
कल तक एक चांद चलता था साथ मेरे,
बची यादों की सफर, और अफ़साने ज़रूरी हैं |
December 26, 2007 at 8:52 pm
दिल और व्यवहारिकता दोनों के क़रीब!
December 26, 2007 at 9:22 pm
बहुत बढिया गजल है।बधाई।
महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|
December 26, 2007 at 9:34 pm
जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
wah wah jyotsanaji,dil kush kar diya apne.
jab ishq kiya hai,to uske saath aanewali ilzam bhi to sahne hi honge.
deep bujhanewala sher bhi khas hai ekdam.
aurमहफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
ye wala bhi.masha allah.
December 26, 2007 at 9:47 pm
बहुत प्यारी और सच्चाई से भरी पंक्तियाँ हैं !
इबादत से नहीं मिलता, खुदा किसी को
पत्थरों से अश्क निकालने जरूरी हैं !
December 27, 2007 at 1:32 pm
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं|
ye lines kuchh khaas hain. yakeen maniye, main to inko dil se laga chuka hun.
Khoob likhiye, Likhte rahiye.
Thanks
December 27, 2007 at 1:32 pm
aapne takhallus ka umda prayog kiya.
December 28, 2007 at 10:13 am
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
बहुत खूब….बहुत उम्दा…
नववर्ष की अनन्त शुभकामनाएं।
December 31, 2007 at 1:11 am
Bahut pyara likha hai ……..
February 3, 2008 at 4:02 pm
bahut khoob- jyoti….
ek software engineer itna touchy hoga kya zamanz mehsoos kar sakta hai
sach hai
zindagi ke aine mein zindagi sharma gayee
tumne zab palke uthaein chandni sharma gayi
but i say
tumne zab kavita likhi to shayari sharma gayee
February 12, 2008 at 4:44 pm
how emotional your writting
March 20, 2008 at 5:02 pm
itne bhi be rhm na ban jayeye