इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं
Posted by hemjyotsana "Deep" on December 26, 2007
सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |
जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
माना के तबाह किया उसने मुझे ,
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |
ज़ख़्म दिल के नासूर ना बन जाए
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |
माना वो ज़िंदगी हैं मेरी लेकिन ,
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|














Prem Piyush said
क्या खुब लिखा है “दीप”, गजल काफी पसंद आया ।
इसी तर्ज पर कुछ यूँ अर्ज है –
जिन बातों को कल तक न समझा था,
न जाने क्यों , आज समझना जरुरी है ।
कल तक एक चांद चलता था साथ मेरे,
बची यादों की सफर, और अफ़साने ज़रूरी हैं |
उमाशंकर सिंह said
दिल और व्यवहारिकता दोनों के क़रीब!
paramjitbali said
बहुत बढिया गजल है।बधाई।
महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|
mehek said
जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |
wah wah jyotsanaji,dil kush kar diya apne.
jab ishq kiya hai,to uske saath aanewali ilzam bhi to sahne hi honge.
deep bujhanewala sher bhi khas hai ekdam.
aurमहफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |
ye wala bhi.masha allah.
omansh said
बहुत प्यारी और सच्चाई से भरी पंक्तियाँ हैं !
इबादत से नहीं मिलता, खुदा किसी को
पत्थरों से अश्क निकालने जरूरी हैं !
Avinash said
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं|
ye lines kuchh khaas hain. yakeen maniye, main to inko dil se laga chuka hun.
Khoob likhiye, Likhte rahiye.
Thanks
Avinash said
aapne takhallus ka umda prayog kiya.
ramadwivedi said
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
बहुत खूब….बहुत उम्दा…
नववर्ष की अनन्त शुभकामनाएं।
Amit Kulshrestha said
Bahut pyara likha hai ……..
sunil ojha said
bahut khoob- jyoti….
ek software engineer itna touchy hoga kya zamanz mehsoos kar sakta hai
sach hai
zindagi ke aine mein zindagi sharma gayee
tumne zab palke uthaein chandni sharma gayi
but i say
tumne zab kavita likhi to shayari sharma gayee
reeta yadav said
how emotional your writting
reeta said
itne bhi be rhm na ban jayeye
महावीर said
वाह! बहुत ख़ूबसूरत ख़यालों से भरी हुई गज़ल हैः
इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |
रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|
बहुत ख़ूब!
prashant malik said
bahut khoob