लम्हें जिन्दगी के

मेरी कवितायें

Archive for December 26th, 2007

इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं

Posted by hemjyotsana "Deep" on December 26, 2007

सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं |
ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं |

जिन आँखों में हँसी का धोखा हो
उन के मोती चुराने ज़रूरी हैं |

माना के तबाह किया उसने मुझे ,
मगर रिश्ते निबाहने ज़रूरी हैं |

ज़ख़्म दिल के नासूर ना बन जाए
मरहम इन पे लगाने ज़रूरी हैं |

माना वो ज़िंदगी हैं मेरी लेकिन ,
पर दूर रहने के बहाने ज़रूरी हैं |

इश्क़ बंदगी भी हो जाए, कम हैं,
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं |

महफ़िल में रंग ज़माने के लिए ,
दर्द के गीत गुन-गुनाने ज़रूरी है |

रात रोशन हुई जिनसे ,सारी ,
सुबह वो ”दीप” बुझाने ज़रूरी हैं|

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